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लंदन में जिंदगी के लिए जूझ रहे मासूम दुष्यंत को बोन मैरो देने की पेशकश

6 वर्ष पहले
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लंदनमें दस साल के मासूम दुष्यंत की जिंदगी खतरे में है। उसकी जिंदगी बचाने के लिए भिवानी का एक शख्स सामने आया है। उसने दुष्यंत को बोन मैरो डोनेट करने की इच्छा जताई है। दुष्यंत को किसी भारतीय मूल के डोनर से ही बोन मैरो लेना है।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड मुख्यालय में सहायक धर्मबीर डाबला ने दैनिक भास्कर के आठ फरवरी के अंक में पढ़ा कि जिंदगी देने वाला बच्चा जिंदगी को मोहताज। इसमें लंदन में बैठे दस साल के दुष्यंत को किसी भारतीय मूल के बोन मैरो डोनर की जरूरत है। धर्मबीर डाबला के दिमाग में तुरंत उस बच्चे की मदद करने की अच्छा जागृत हुई। उसने बताया कि वह अपना बोन मैरो दुष्यंत को देने के लिए तैयार है। अगर उसकी जांच के बाद बोन मैरो दुष्यंत को ट्रांसप्लांट हो सके तो इससे ज्यादा खुशी उसके लिए कुछ नहीं होगी।

दुष्यंत ने दो साल की उम्र में बड़ी बहन को दिया था बोन मैरो

लंदनमें रहने वाले दुष्यंत ने दो साल की उम्र में अपनी बड़ी बहन दिव्यांशी को बोन मैरो डोनेट किया था। मगर दुर्भाग्य से अब दुष्यंत को भी इसकी आवश्यकता है। दुष्यंत ने दो बार बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया था। मगर अब चिकित्सकों ने उसे बोन मैरो के लिए किसी भारतीय मूल के इंसान द्वारा डोनेट बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सलाह दी है।

ये है बोन मैरो

उपसिविल सर्जन डॉ कृष्ण कुमार ने बताया कि बोन मैरो हड्डी के अंदर का गूदेदार (लिसलिसा) पदार्थ होता है, जो मनुष्य के शरीर में बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। इस पदार्थ को किसी दूसरे व्यक्ति से भी ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। एक बार सही ट्रांसप्लांट होने के उपरांत दस साल तक फिर उस व्यक्ति को कोई दिक्कत नहीं होती।

न्यूज की कटिंग के साथ बोर्ड में सहायक धर्मबीर।