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मिलकर देश बनाएंगे, निश्चित ही अच्छे दिन फिर से आएंगे...

7 वर्ष पहले
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अखिलभारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में सोमवार को काव्य गोष्ठी हुई। गोष्ठी आजाद नगर स्थित ओम सुंदरम भवन में हुई। गोष्ठी की अध्यक्षता परिषद के महामंत्री डॉ. योगेश वशिष्ठ ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए श्री निवास मयंक ने सरस्वती वंदना से किया।

इसके बाद विनोद बेचैन ने अव्यवस्थाओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विडंबनाओं का दौर अभी तक जारी है अन्य अव्यवस्थाओं की फेहरिस्त बहुत भारी है। मनोज कुमार शर्मा ने बोर्ड परीक्षाओं में चल रही नकल को आड़े हाथों लिया तो ज्ञानेंद्र तेवतिया ने कहा कि हमने कई जमाने देखे, दोस्त नए पुराने देखे,नशे मुक्त शहरों में हमने घर घर में मयखाने देखे। महेंद्र सागर ने दूसरों के लिए खोती त्याग प्रवृति को इस तरह बयां किया खुद को करके फना दूसरों को बचाना है जग में होती नहीं रीत रे।

इसी प्रकार ओज के कवि ने अच्छे दिनों को अपनी कविता के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए कहा कि मिलकर देश बनाएंगे, निश्चित ही अच्छे दिन फिर से आएंगे। कवि पूनम चंद वेणु ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर कटाक्ष किए तो कवि यशकीर्ति ने अजन्मी बेटी करे पुकार कविता के माध्यम से भ्रूण हत्या कि कुप्रथा पर प्रहार किया। इन के अलावा शिवराज सिंह परमार, वरिष्ठ शायर बिजेंद्र गाफिल,डॉ. मनोज भारती, डॉ. योगेश वशिष्ठ, सूबेदार, विनोद आचार्य ने अपनी कविता के माध्यम से खूब वाहवाही लूटी। इस अवसर पर अनेक श्रोतागण उपस्थित थे।