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गायों को तला भोजन नहीं हरी सब्जियां और फल ही खिलाएं

7 वर्ष पहले
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गौरक्षा दल के स्वयंसेवक मंगलवार को दिन भर शहर में गौ ग्रास एकत्रित करने के लिए रेहड़ी लेकर चक्कर लगाते रहे।

लोगोंको की अपील

मंगलवारको पितृ अमावस्या थी। इस लिए सुबह से ही गौ सेवक शहर के अनेक भागों में गौ ग्रास एकत्रित करने के लिए रेहड़ी लेकर निकल पड़े। गौ भक्त स्पीकर से नागरिकों को गौ ग्रास देने का आग्रह कर रहे थे। गौरतलब है कि अमावस्या के दिन लोग गोवंश को पका हुआ तला हुआ भोजन खिला देते हैं।

रोटियों पूरियों की संख्या भी काफी होती है। नागरिक इतना भोजन एक ही गाय को खिला देते हैं। अधिक भोजन ग्रहण करने से गाय को अफारा हो जाता है तथा उसकी मृत्यु हो जाती है। गायों को बचाने के लिए ही गौ भक्त अमावस्या को गौ ग्रास नागरिकों से एकत्रित कर लेते हैं ताकि गौशाला में रह रही गायों को वह गौ ग्रास खिलाया जा सके। पिछले तीन सालों पर नजर डाले तो वर्ष 2011 में 22, वर्ष 2012 में 17 वर्ष 2013 में 23 गऊ तला भोजन खाने से मौत का शिकार हुई थी।

इस बार कहीं से भी गायों के बीमार नहीं होने से गौसेवकों ने राहत की सांस ली। गौरक्षा दल के संजय परमार ने शहरवासियों से अनुरोध किया कि कि बुधवार को भी १०.४२ बजे तक अमावस्या है। पितृ तर्पण के लिए गौ ग्रास के रूप में हरी सब्जी या फलों का प्रयोग करें कि तली हुई पूरी हलवा का।