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राजमोहन बने हाइकोर्ट के जज

7 वर्ष पहले
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बापोड़ानिवासी एडवोकेट राजमोहन गुरुवार को पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट के न्यायाधीश बन गए हैं। वे भिवानी जिले के पहले एडवोकेट हैं जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। इससे पहले बापोड़ा निवासी वीके सिंह भारतीय थल सेना के अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। इसलिए राजमोहन बापोड़ा के अलावा पूरे भिवानी जिले के एक गौरव की बात है।

मूल रूप से बापोड़ा निवासी महेंद्रपाल के बेटे राजमोहन ने 1985 में कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से एलएलबी पास की। इसके बाद उन्होंने पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट चंडीगढ़ में ही वकालत करनी शुरू कर दी। उनके पिता रोडवेज में टीएम के पद से रिटायर हुए थे तो उनका बड़ा भाई सुदर्शन इन दिनों बैंक में नौकरी कर रहा है। न्यायाधीश राजमोहन ने पहली बार 2003 में बार कौंसिल आॅफ पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट चंडीगढ़ की सदस्यता के लिए चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने यह उपलब्धि 2008 और 2013 में इसकी हैट्रिक बनाई। इसी दौरान उनका चयन बार कौंसिल ऑफ इंडिया के लिए हुआ। वे पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट के चयनित 25 सदस्यों में से इकलौते थे। वहीं बार कौंसिल ऑफ इंडिया के लिए कुल 17 ही सदस्य होते हैं। गुरुवार को पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने राजमोहन सहित 12 अन्य न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई है। इन 12 न्यायाधीशों में पांच सेशन जजों को पदोन्नति तो सात एडवोकेट पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट से चुने गए हैं। इसलिए न्यायाधीश राजमोहन पहली बार भिवानी जिले के वे एडवोकेट हैं जो सीधे हाइकोर्ट जज बने हैं। जिला बार एसोसिएशन के सदस्यों मदन सिंह वर्मा, संजय यादव, योगेंद्र वर्मा, अनूप सिंह वर्मा, डॉ. रामनिवास रोहिल्ला, नीरज वर्मा, कृष्ण भाटिया, शौकीन सिंह वर्मा, आरसी गुगनानी आदि ने खुशी जताई है।

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशबापोड़ा निवासी एडवोकेट राजमोहन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हुए।