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दौरा | जिले में सूखे का जायजा लेने के लिए पहुंचा केंद्रीय अफसरों का दल
छह जगह खरीफ की बर्बाद फसलें दिखाईं
भास्कर न्यूज | भिवानी
सूखाग्रस्तएवं बीमारी से खराब हुई खरीफ की कपास, ग्वार, बाजरा, ज्वार आदि फसलों का आंकलन करने के लिए शनिवार को केन्द्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के एक दल ने पहले प्रशासन के अधिकारियों से सूखाग्रस्त क्षेत्रों की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने सिंचाई, जन स्वास्थ्य विभाग, मछली पालन, पशुपालन बागवानी अधिकारियों, उपनिदेशक कृषि विभाग, एसडीएम तोशाम सिवानी को साथ ले बाद दोपहर तीन बजे गांव जमालपुर के खेतों का दौरा किया।
इस गांव से ही किसान सभा हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष मास्टर शेरसिंह के नेतृत्व में नौ सदस्यीय टीम जिसमें रामफल देशवाल, हीरासिंह यादव, ओमप्रकाश सैनी, इंद्रसिंह कादियान, बलवान बागड़ी, राजबीर सिंधु, दीवान सिंह जाखड़ दयानंद शर्मा भी थे। केन्द्रीय दल में प्लानिंग कमीशन अनुसंधान कृषि डाॅ. रामानंद डाॅ. डीपी मलिक नेतृत्व कर रहे थे।
इस केन्द्रीय टीम के सामने जिले में जमालपुर, पपोसा, रतेरा, बोहल, सीपर, बलियाली, बवानी खेड़ा, सुमरा खेड़ा के किसान सूखा बीमारी से तबाह हुई कपास, ग्वार सब्जी की फसलों की बानगी अपने साथ लेकर आए थे। इन गांवों में केन्द्रीय दल ने खेतों में खड़ी फसलों का मुआयना किया। इसके बाद उन्होंने आमसभा कर विभिन्न गांवों के मौके पर उपस्थित किसानों के विचार भी जाने। किसान सभा के प्रदेशाध्यक्ष शेरसिंह ने ब्यौरा देते हुए बताया कि अगस्त के अंत तक इस साल में मानसूनी बारिश 65 प्रतिशत औसत से कम रही। इस कारण इस कम बारिश में किसानों ने जो खरीफ की फसलें असिंचित क्षेत्र में की थी वे तो शत-प्रतिशत सूखे के कारण बर्बाद हो गई थी। इसमें भिवानी का लगभग 62 प्रतिशत खेती क्षेत्र बारिश पर निर्भर है। इसके अलावा 38 प्रतिशत जिसमें नलकूपों नहरों से सिंचाई हो सकती है वहां नहरों में पानी कम आने से टेलों तक पानी पहुंच पाने के कारण उनकी फसल खराब हो गई। इसके बावजूद किसानों ने किसी तरह डीजल जलाकर अपनी फसल को बचाने के लिए और ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। मगर उस फसल को भी सितंबर में हुई बेमौसमी बारिश के कारण उनकी वे फसलें भी खराब हो गई।
इस दौरान किसान सभा ने निर्णय लिया कि 15 सोमवार को बहल, लोहारू भिवानी में प्रदर्शन, मंगलवार को तोशाम, बुधवार को सिवानी बौंद में तथा गुरुवार को बाढड़ा तथा 19 सितम्बर को आखिरी प्रदर्शन बवानी खे