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- \"आज के दिन सरकारी काम काज पर शर्मिंदा हूं\'
\"आज के दिन सरकारी काम-काज पर शर्मिंदा हूं\'
{कैरू में हिंदी दिवस पर काव्य गोष्ठी आयोजित
भास्करन्यूज | कैरू
विश्वहिन्दी दिवस के मौके पर कैरू में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की शुरुआत मां शारदे तुझे भुला नहीं सकते, है लाज तेरे हाथ में तुम बिन गा नहीं सकते नामक काव्य पाठ से मां सरस्वती की वंदना करते हुए हरीश अकेला ने मां सरस्वती के चित्र को पुष्प अर्पित किए। भिवानी से आए विजेंद्र सिंह ने अपने काव्य पाठ में हिन्दी दिवस मनाने की औपचारिकता पर व्यंग्य कसते हुए कहा मां ने बेटे से कहा बेटा मैं जिंदा हूं, हालात पे अपनी शर्मिंदा हूं, लाज लूटी जाती है हर रोज, पर आज के दिन सरकारी काम काज पर शर्मिंदा हूं। तोशाम के नरेंद्र भारद्वाज ने हिन्दी को हम सबके लिए गौरव का विषय बताया तो श्रीधर नीर ने हिन्दी को सर्वोपरि स्थान देते हुए हिन्दी को हिंदुस्तान की बिंदी कहा। मनीष राही, हरिसिंह बुंदेला, अभिषेक अभि के साथ पवन केशव, आशीष अपना जैसे कवियों ने भी काव्य गोष्ठी में भाग लिया। पुनफेर सदन की ओर से हुई इस काव्य गोष्ठी के अंत में रविन्द्र वर्मा रवि ने कहा कि हिन्दुस्तान में हिन्दी दिवस मनाया जाना समझ से परे है। हिन्दी राष्ट्र और जन भाषा है। इसे मात्र एक दिन की भाषा बनाकर हम इसके साथ अन्याय कर रहे हैं। वास्तव में तो मां और मातृभाषा का अपनों के द्वारा ही सम्मान किया जाना चाहिए। मगर दुर्भाग्य से हिन्दी को अपनी ही जमीन पर दुत्कार मिल रही है।