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सेक्टरों की टूटी सड़कों के लिए इसी सप्ताह 6 करोड़ रुपये की मंजूरी मिलने की उम्मीद
दोसाल से परेशानी झेल रहे सेक्टरवासियों को शीघ्र ही पुरानी और जर्जर सड़कों से छुटकारा मिल जाएगा। हुडा की ओर सेक्टर 13 23 के लिए भेजे गए छह करोड़ के एस्टीमेट को इसी सप्ताह मंजूरी मिलने की उम्मीद है। एस्टीमेट को मंजूरी मिलने के बाद चार महीने में यहां की सभी सड़कें चकाचक नजर आएंगी। सूत्रों के अनुसार चीफ इंजीनियर एस्टीमेट को मंजूर कर चुके हैं और इसे विभाग के वित्त नियंत्रक के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है।
एस्टीमेट के अनुसार सेक्टर 23 की सभी सड़कें नए सिरे से बनाई जाएंगी, जबकि सेक्टर 13 के ईडब्लूएस पॉकेट की सड़कें इंटरलॉकिंग टाइल्स से बनाई जाएंगी। इसके लिए 285 लाख का एस्टीमेट बना कर भेजा गया है। सेक्टर 13 के शेष रोड पर पेच वर्क किया जाएगा।
1994 में आबाद होने के बाद सेक्टर की सड़कों पर दो-तीन बार पैचवर्क जरूर हुआ, लेकिन कोई भी सड़क दोबारा नहीं बनाई गई है। आज सेक्टर 13 23 की एक भी सड़क सही सलामत नहीं है। सड़कों को देखकर लगता है कि काफी समय से इनकी देख-रेख नहीं की गई। दोनों सेक्टरों की सड़कों से तो गांव की गलियां भी अच्छी दिखाई देती हैं। सड़कों पर एक से डेढ़ फुट तक के गड्ढे बने हुए हैं।
भिवानी रेजीडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन सेक्टर 13 के प्रधान रामकिशन शर्मा, श्रीराम सेवा समिति सेक्टर 13 के प्रधान नरेंद्र शर्मा, रेजीडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन 23 के प्रधान ओमप्रकाश धारीवाल, सुरेंद्र धानक, डॉ. विजय, डॉ. आर वत्स, सुरेंद्र सिंगल, सूबेदार सुरेंद्र सिंह, श्योपाल, बलवान सिंह, बाबूलाल, ओमप्रकाश रावत आदि के अनुसार वे लगभग 100 बार हुडा के अधिकारियों को सड़कों की जर्जर व्यवस्था के बारे अवगत करवा चुके हैं। सात जुलाई 2014 को सेक्टर के लोगों का एक शिष्टमंडल तत्कालीन हुडा प्रशासक राजीव रंजन से हिसार में उनके कार्यालय में मिला था। उस समय उन्होंने एक माह में सड़कों की व्यवस्था सुधारने का वादा किया था। इसके बाद भी कोई सुधार नहीं किया गया।
हुडा के कार्यकारी अभियंता एके आर्या भी मानते हैं कि वास्तव में सड़कों की व्यवस्था काफी दयनीय है। इनके लिए लगभग छह करोड़ रुपये का एस्टीमेट बना कर भेजा हुआ है। एस्टीमेट पास होते ही टेंडर लगा दिए जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई है कि निर्माण कार्य शीघ्र ही शुरू कर दिया जाएगा।
इस समय एस्टीमेट चीफ इंजीनियर से पास होकर विभाग के वित्त कंट्रोलर के पास पास होने के लिए गया हुआ है। यहां से पास होते ही इसे पुन: मंजूरी के लिए चीफ इंजीनियर के पास भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद टेंडर जारी किए जाएंगे। इसमें 15 दिन लग सकते हैं। टेंडर अलॉट होते ही सड़कों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। सड़कों के निर्माण में करीब दो माह का समय लग सकता है।
विभाग ध्यान देता तो नहीं होती ये हालत
भिवानीरेजीडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन सेक्टर 13 के अध्यक्ष रामकिशन शर्मा ने बताया कि अनेक बार हुडा के अधिकारियों यानि की एसडीओ से लेकर प्रशासक तक को सड़कों की समस्या से अवगत करवाया जा चुका है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया है। शुरू में ही सड़कों को दुरुस्त कर दिया जाता तो आज यह हालात नहीं होती।
सेक्टर 13 वीकर सेक्शन में टूटी सड़क जमा पानी परेशानी का सबब बना है।
रोड़े डाले, रोड नहीं बनाया
सेवानिवृत्तसैनिक ओमप्रकाश रावत ने बताया कि सेक्टर 13 वीकर सेक्शन के मकान नंबर 415 वाली सड़क का आज तक निर्माण नहीं किया गया है। इस सड़क पर केवल चार इंची रोड़े ही डाले गए थे। इससे लोगों को आने जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।