आरोप लगाकर कई छोड़ गए पार्टी
स्रोत- सरकारकी ओर से मीडिया में जारी विज्ञापन
2766.27
2691.56
2396.68
2190.32
1552.72
3896.14
3691.79
3177.78
3103.61
3074.29
सिरसा
रेवाड़ी
करनाल
जींद
पानीपत
कुरुक्षेत्र
यमुनानगर
महेंद्रगढ़
पंचकूला
पलवल
हिसार 4641.55
भिवानी4608.84
मेवात4560.39
फरीदाबाद4514.00
कैथल4419.00
फतेहाबाद4229.14
अंबाला4194.00
रोहतक 15873.00
झज्जर13985.00
सोनीपत5629.82
गुड़गांव5293.29
आंकड़े
प्रदेश प्रभारी शकील अहमद को भी प्रदेश में हुए विकास कार्यों पर खर्च राशि के आंकड़े तो सरकार ने उपलब्ध कराए और ही विरोधी गुट दे पाया। उन्होंने विरोधियों को चुनौती दी थी कि अगर कहीं भेदभाव हुआ है तो वे आंकड़े देकर साबित करें।
सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समान विकास के दावों को सही ठहराने के लिए हरियाणा सरकार ने 21 में से 19 जिलों के विज्ञापन जारी किए। इनमें पिछले साढ़े नौ साल के विकास संबंधी आंकड़ों को जोरशोर से प्रचारित किया गया। लेकिन रोहतक और झज्जर जिलों के विकास पर हुए खर्च को सार्वजनिक नहीं किया गया। दैनिक भास्कर ने करीब एक पखवाड़े से ज्यादा समय तक सरकार से इन जिलों में विकास कार्यों पर हुए खर्चे के आंकड़े मांगे, लेकिन सीएमओ और सरकारी अफसर देने को तैयार नहीं हुए। इन जिलों के विकास संबंधी खर्चों के आंकड़े बमुश्किल हासिल किए गए।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा विकास में भेदभाव के आरोपों को शुरू से ही नकारते रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पूरे प्रदेश में समान रूप से विकास करवाया है। किसी भी जिले या क्षेत्र के विकास की तुलना पिछली गैर कांग्रेसी सरकार के कार्यकाल से की जानी चाहिए। जो लोग विकास में भेदभाव के आरोप लगा रहे हैं, उनमें से कई नेता तो सार्वजनिक बयान भी दे चुके हैं कि उनके क्षेत्र में जितना विकास हमने करवाया है, उतना आज तक किसी ने नहीं करवाया। भेदभाव के आरोप लगाने वालों के पास कोई मुद्दा नहीं है और वे निजी स्वार्थों के कारण ऐसे आरोप लगा रहे हैं।
यहां आए बड़े प्रोजेक्ट
अगर सीएम हुड्डा के हरियाणा में समान विकास के दावे इतने ही सही हैं तो उन्हीं की पार्टी के लोग आरोप क्यों लगा रहे हैं? उनकी मंशा अगर साफ है तो वे सभी विधायकों में केंद्रीय ग्रांट समेत विकास कार्यों का पैसा विकास निधि के माध्यम से समान बंटवारा क्य