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हरियाणा चुनाव तक थम सकती है दिल्ली में सरकार की कवायद

7 वर्ष पहले
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भाजपाकी दिल्ली में सरकार बनाने की कवायद हरियाणा चुनाव तक थम सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दिल्ली में भाजपा के अनेक कार्यकर्ता राजधानी की सीमा से लगे हरियाणा के जिलों जैसे फरीदाबाद गुड़गांव से लेकर पानीपत रोहतक के हैं। सभी कार्यकर्ताओं की अब अपने स्थानीय चुनाव में केवल स्वाभाविक रूप से सक्रियता बढ़ जाएगी बल्कि पार्टी की ओर से भी उन्हें अपने प्रदेश में सक्रिय होने का आदेश भी मिला है। ठीक एक महीने बाद हरियाणा में 15 अक्टूबर को चुनाव है।

राजनीतिक जानकार यह भी कह रहे हैं कि भाजपा नहीं चाहेगी कि दिल्ली में सरकार बनाने की कवायद का हरियाणा चुनाव पर गलत असर जाए। क्योंकि आम आदमी पार्टी लगातार भाजपा विधायक दल के तत्कालीन नेता डॉ. हर्षवर्धन के उस बयान का हवाला दे रही है जिसमें उन्होंने कहा था कि बहुमत होने की दशा में मैं और मेरी पार्टी राजनैतिक आदर्शों की उच्च परंपरा का निर्वाह करते हुए नैतिकता के आधार पर विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे। इसी बयान को दिखाकर अब आप बार-बार पूछ रही है कि आखिर अब बहुमत कैसे जुट गया? इसी आधार पर भाजपा पर खरीद-फरोख्त करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। आप ने हाल ही में एक स्टिंग जारी किया है।





हालांकि, भाजपा ने वार्ड स्तर पर अपने पार्षदों को चुनाव की तैयारी करने के लिए कह दिया है, ताकि उनके कामकाज का चुनाव पर सकारात्मक असर पड़े। वैसे भी भाजपा के पास कम से कम फरवरी तक का सुरक्षित समय है क्योंकि तब तक दिल्ली में राष्ट्रपति शासन रहने की नियमतः पूरी संभावना है।