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यमुना नदी से सरेआम हथियारधारी लूट रहे रेती
तमामदावों के बावजूद यमुना नदी से रेती माफिया हथियारों के बल पर रेती को लूट रहे हैं। यह सिलसिला 2010 से जारी है। रातों-रात रेती से भरे सैकड़ों ट्रैक्टर दूसरे जिलों दिल्ली की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। विरोध करने पर माफिया केवल ग्रामीणों, बल्कि पुलिस को भी नहीं बख्शते। हर वक्त जेब में घातक हथियार रखने वाले रेती माफियाओं का विरोध करने से पुलिस भी कतराने लगी है। इस समय सबसे अधिक रेती की खपत नहरपार डेवलप हो रहे ग्रेटर फरीदाबाद दिल्ली में है।
हालमें सामने आए कई मामले : खेड़ीपुलपुलिस चौकी ने सितंबर में छापा मारकर रेती चोरी के कई मामले पकड़े थे। कई ट्रैक्टरों को कब्जे में लिया था। भूपानी थाने में यह मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा करीब तीन माह पहले रेती चोरी को लेकर यमुना किनारे गोलीबारी हुई। इसमें दो लोगों को गोली लगी। मामला भूपानी थाने में दर्ज किया गया। इसके अलावा आए दिन रेती चोरी के मामले विभिन्न थानों में दर्ज किए जा रहे हैं। शेषपेज 15 पर
कौन सी लगती है धारा
खननविभाग के 1957 एक्ट के अनुसार 21.4ए के तहत रेती चोरों पर कार्रवाई होती है। इसके तहत जुर्माना एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान है। उधर पुलिस विभाग के पास यमुना नदी से अवैध रूप से रेती चोरी करने के आरोप में 379 और 188 धारा लगती है। इसके तहत कोर्ट जुर्माना सजा निर्धारित करता है। इन धाराओं में आज तक सजा नहीं हुई।
क्याकर रही है पुलिस
ऐसेमामलों में पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। इस कारण माफियाओं का खेल नहीं रुक पा रहा है। खनन वाले इलाकों में भूपानी, तिगांव, छायंसा, सराय ख्वाजा थाने की सीमाएं लगती हैं। पुलिस पर हुए हमलों में यह बात सामने आई है कि पुलिस द्वारा मोटी रकम वसूले जाने पर ही माफियाओं ने पुलिस पार्टी पर हमला किया था और उनको दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। गत वर्ष एक माह के अंदर दो थानों की पुलिस टीमों पर माफियाओं ने जानलेवा हमला किया।
पुलिस पर हो चुके हैं हमले
>11 जून 2012 को पल्ला चौक पर नाकेबंदी के दौरान एक डंपर चालक ने पुलिसकर्मी को कुचल दिया। सिपाही की मौके पर ही मौत हो गई।
> 28 नवंबर 2011 को तिगांव थाना पुलिस कबूलपुर गांव के पास रात को रेत माफिया ने पुलिस पर हमला बोल दिया। इसके बाद दो बार पुलिस पर हमला कर माफिया उसके कब्जे से ट्रैक्टर बाइक भी लूटकर ले गए। इतना ही नहीं म