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नेताओं का भाषण सुनने के लिए निकल पड़ते थे पैदल
फरीदाबाद | अबवैसे नेता रहे और ही लोग। पहले चुनाव के दौरान जब बड़े नेता भाषण देने आते थे। पैदल ही महिला पुरुषों का हुजूम उमड़ पड़ता था। आज की तरह बस या अन्य कोई वाहन की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती थी। एक कोशिश नेताओं की तरफ जनता को खिंच ले आती थी। आजादी मिली तो सभी में गजब का उत्साह था। पहले आम चुनाव की यादें अब धुंधली पड़ रही हैं। मतदान को लेकर उत्साह होता था। अच्छे-बुरे नेताओं का फर्क सभी को मालूम होता था। चुनाव प्रचार तो काफी निराले होते थे। बैल गाड़ी-तांगे आदि का खूब इस्तेमाल होता। जब नेता नुक्कड़ पर भाषण देने आते थे। सभी लोग एकजुट होकर उन्हें सुनने आते। अब जमाना बदल गया। एसएमएस व्हाट्सअप पर मैसेज आते हैं। संचार के युग में सभी दिमाग से तो पास गए। लेकिन दिल से दूर हो गए। पहले सभी दिल से जुड़े हुए थे। नेता जनता में विश्वास का रिश्ता होता था। अब इसमें कमी आई है। समय के साथ कई चीजें बदलती हैं। प्रचार से लेकर विचार तक बदल गए। पहले के नेता वादों की कसौटी पर खरे उतरते थे। अब कसौटी पर उतरने का प्रयास भर होता है। आज की तरह चुनाव के समय देशभक्ति गीत का पहले भी खूब सुनने को मिलते थे। अब भी जब चुनाव प्रचार के दौरान देशभक्ति गीत सुनने को मिलता है। सुकून मिलता है। कम से कम इसमें तो बदलाव नहीं हुआ है। युवाओं को लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनशील होना पड़ेगा। तभी बात बनेगी।
डॉ.एमएम कथूरिया, सामाजिककार्यकर्ता शिक्षाविद, सेक्टर-9