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रामलीला : हठीली तूने क्या ठानी मन में...

7 वर्ष पहले
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कैकेयीरी तूने क्या ठानी मन में, राम-सीया भेज दिए री वन में ..रामलीला में गाने के ये बोल दृश्य देख दर्शकों के आंखें भर आईं। राम के राजपाट छोड़ वन जाने का दृश्य देख दर्शकों के नेत्र सजल हो गए। कलाकारों द्वारा मनमोहक लीला मंचन का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। शहर में अलग-अलग जगह हो रही रामलीला में अलग-अलग दृश्यों का मंचन किया गया। कहीं राम का वनवास हुआ तो कहीं राम जन्म। कहीं ताड़का वध तो किसी रामलीला में राम को वनवास देने की सूचना पाकर भरत का विलाप कैकई संवाद दिखाया गया। जिसे देख दर्शक भावुक हो गए।

रामके वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण

एनएच-1विजय रामलीला कमेटी की रामलीला मंचन में अयोध्या नरेश राजा दशरथ राम के राजतिलक की तैयारियां तेजी से होने लगीं। पूरी अयोध्या को सजाया जाने लगा। यह सब देखकर रानी कैकईासी मंथरा उनके पास पहुंचती है। वे भरत को राजगद्दी राम को 14 वर्षों का वनवास राजा से मांगने के लिए उकसाने लगी। रानी ने कहा कि राजगद्दी ही मांग ली जाए लेकिन मंथरा ने कहा कि राम के राजा होने पर राज गद्दी संभव नहीं, जिस पर रानी ने राजा दशरथ से अपने दो वरों का याद दिलाया और मंथरा द्वारा बताया गया प्रस्ताव रखा। राजा के लाख कोशिश के बाद भी रानी ने अपना निर्णय अटल रखा। जहां राजतिलक की तैयारियां चल रही थीं वहीं माहौल गमों में बदल गया। राम ने अपने माता-पिता की आज्ञा मानकर वन जाने का निर्णय अटल कर लिया। उनके साथ सीता और लक्ष्मण भी चल पड़े। राम के वन जाने की सूचना पाते ही राजा दशरथ अपना प्राण त्याग देते हैं। राम वन के लिए जाते हैं और नदी पार करने के लिए केवट से आग्रह करते हैं। लेकिन बिना चरण पखारे वह उन्हें नाव पर बैठाने को तैयार नहीं हैं। दशरथ की भूमिका का संजय ने निभाया। पुत्र वियोग में प्राण त्यागते देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं।

मुझेतो राज पापिन विष के बराबर है

‘मुझेतो राज पापिन विष के बराबर है, जिसे तू राज कहती है वह कंकर और पत्थर है..ये संवाद जब जागृति रामलीला में भरत विलाप के दृश्य में भरत ने कहे। यहां माता कैकेयी द्वारा भाई राम को वनवास भेजने पर वे उन्हें कोसते हैं। भरत बने योगेश भाटिया के कहे इस संवाद का उपस्थित दर्शकों ने तालियां बजा कर स्वागत किया।

जागृति रामलीला द्वारा आयोजित रामलीला में भरत विलाप का दृश्य कलाकारों द्वारा मनमोहक तरीके से दिखाया गया। राम अनिल गां