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अस्पतालों में घूम रहे कुत्ते

7 वर्ष पहले
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एकदिन पहले बीके अस्पताल में कुत्ते द्वारा नवजात के शव को उठाकर भागने की घटना के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं। इस घटना से सरकारी अस्पतालों ने कोई सबक नहीं लिया। दूसरे दिन गुरुवार को बीके अस्पताल में कुत्ते परिसर में धमाचौकड़ी मचाते देखे गए। अस्पताल की इमरजेंसी, ओपीडी सिविल सर्जन कार्यालय के आसपास आवारा कुत्ते घूम रहे थे। ये हालात सिर्फ बीके अस्पताल के ही नहीं रहे बल्कि जिले के दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों के भी रहे।

केस-1: हथीननिवासी शमशेर अपनी प|ी प्रेमलता की डिलीवरी के लिए बीके अस्पताल रेफर किया गया था। बुधवार को प्रेमलता का आपरेशन किया गया था। उन्होंने एक मृत बच्ची को जन्म दिया। अस्पताल कर्मचारियों ने शिशु को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। प्रेमलता को वार्ड में शिफ्ट कर दिया। शमशेर ने बताया कि वे बच्ची के शव को लेकर मां उसका भाई मृत शिशु को लेकर इमरजेन्सी के गेट के पास गए। शमशेर उसका भाई जाने के लिए वाहन का इंतजाम करने के लिए अस्पताल के बाहर चले गए। उनकी माता दो वर्षीय बेटी वहीं बैठ गए। बेटी ने पीने के लिए पानी मांगा। इसलिए शमशेर की मां ने बच्ची का शव वहीं कोने पर जमीन पर रख दिया। इसी बीच एक आवारा कुत्ता कपड़े में लिपटे बच्ची के शव को मुंह में दबाकर भाग गया। उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। कुत्ता शव को अस्पताल के पार्क में ले गया।

केस-2: करीबदो साल पहले बीके अस्पताल में इस तरह की घटना हुई थी। डाक्टर ने मृत बच्चे के शव को परिजनों को सौंपा था। परिजन शव को ले जाने का इंतजाम कर रहे थे। इसी बीच वार्ड के बाहर एक आवारा कुत्ता शव को उठा ले गया था।

अधिकारीबदले, नहीं बदले हालात :पहली घटना के दौरान तत्कालीन अस्पताल के पीएमओ ने लंबे चौड़े वायदे किए। अस्पताल के चारों आेर बाउंड्री करने समेत कर्मचारी की ड्यूटी निर्धारित करने के दावे किए गए।

शेषपेज 15 पर





लेकिनइन दो साल में अस्पताल के पीएमओ तो कई बदल गए लेकिन हालात नहीं बदले। इमरजेंसी, ओपीडी, सीएमओ कार्यालय समेत अस्पताल परिसर में जगह-जगह आवारा जानवर मुंह मारते नजर जाते हैं।

कैसे होंगे एनएबीएच के पैनल में शामिल

बीके जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। इसके अलावा बीके को नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर हास्पिटल हेल्थकेयर (एनएबीएच) के पैनल में शामिल करने की तैयारी चल रही है। अस्पताल की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिय