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सहमति नहीं बनने से उद्यमियों की बढ़ रही है परेशानी

7 वर्ष पहले
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एकबार फिर गुड्स सर्विस टैक्स (जीएसटी) पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। ऐसे में अब उद्यमियों की उम्मीद धूमिल हो रही है। इसकी मांग लंबे समय से की जा रही हैं। बजट सेशन में इसे शुरू करने की उम्मीद बंधी थी। अभी विभिन्न तरह के टैक्स उद्यमियों को देने पड़ते हैं। इस वजह से एक से दूसरे विभाग का चक्कर कटाना पड़ता है। सभी टैक्स को समाप्त कर उसकी जगह जीएसटी लगाए जाने के प्रावधान पर चर्चा की जा रही है। 2011 में ही इसे लागू होना था।

उद्यमीसमस्या से होते हैं दो चार

मौजूदासमय में उद्यमियों को कई तरह की समस्याओं से दो चार होना पड़ता है। ऐसे में उन्हें कई तरह के टैक्स के झंझट से बचाने के लिए जीएसटी लागू करने की बात कही गई थी। उद्यमियों को अभी एक से दूसरे राज्य में बिजनेस के लिए जेब ढीली करनी पड़ती है। प्रत्येक राज्य में विभिन्न तरह के वैट के रेट हैं। इस स्थिति में उन्हें परेशानी होती है। कमोबेश यही हाल सेंट्रल सर्विस टैक्स का भी है। जिससे खर्च अधिक होता है। जीएसटी लागू हो जाने के बाद इस तरह की समस्याओं छुटकारा मिलेगा। सभी राज्यों में टैक्स का रेट एक जैसा होगा।

मंत्रीतक उठा चुके हैं बात

शहरके औद्योगिक संगठनों ने केंद्रीय वित्त मंत्री केंद्रीय लघु, मध्यम उद्योग मंत्री सहित संबंधित अधिकारियों को जीएसटी लागू करने का अनुरोध किया है। संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों को इसके फायदे गिनाए गए हैं। इससे उद्यमियों सहित सरकार काे लाभ मिलेगा। जिससे सभी की दशा सुधरेगी।

अभीयह भरना होता है टैक्स

सर्विसटैक्स, वैट, सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी और सेंट्रल सेल्स टैक्स।

^ जीएसटी को लेकर संवेदनशीलता बरतने की जरूरत है। बदलते समय में जीएसटी बेहतर विकल्प है। इसे शीघ्र लागू करने की जरूरत है। जिससे उद्यमियों को लाभ मिल सके। रविभूषणखत्री, महासचिव,लघु उद्योग भारती

^जीएसटीके मुद्दे को विभिन्न प्लेटफार्मों पर उठाया गया है। अभी कई तरह के टैक्स से उद्यमियों को जूझना पड़ता है। जीएसटी लागू हो जाने से काफी सहूलियत मिलेगी। श्रीरामअग्रवाल, अध्यक्षन्यू डीएलएफ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन