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वीकेंड पर कलाकारों ने मचाया धमाल

6 वर्ष पहले
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सूरजकुंड मेले में वीकेंड पर बढ़ी रौनक के बीच कलाकारों ने खूब धमाल मचाया। उमड़ी भीड़ से हस्तशिल्पियों के चेहरों पर भी रौनक देखी गई। दोनों चौपालों पर कलाकारों ने अपनी लोक संस्कृित का परिचय देकर पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों द्वारा पेश कार्यक्रमों पर दर्शकों ने खूब तालिया बजाईं। वहीं विदेशी सैलानी भी मेले में खूब दिखे। मेले में श्रीलंका के कलाकारों ने डांस से भीड़ का खूब मनोरंजन किया। गुजरात, छत्तीसगढ़, जम्मू, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पंजाब, यूपी हरियाणा के कलाकारों ने भी दोनों चौपाल पर कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं विदेशी कलाकारों में कजाकिस्तान, बेलारूस, रशिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान आदि ने भी पयर्टकों को रिझाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

मेले की चौपाल पर शनिवार को 22 से अधिक डांस ग्रुपों ने लोकनृत्यों से समां बांध दिया। साथ ही विदेशी कलाकारों में रशिया के पपेट ग्रुप, कजान के कलाकार ने अपने चिरपरिचित अंदाज में नृत्य की पेशकश की। किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस, कजाकिस्तान के कलाकारों ने मेले की रौनक को दोगुना करने का प्रयास किया। वहीं देसी कलाकारों में गुजरात के सिद्धिगोमा और डांडिया रास, जम्मू के कुठ, पंजाब के भांगड़ा, छत्तीसगढ़ का दीवारकर्मा, पंथी और तपन्यता गुल्लू ने जमकर चौपाल पर धमाल मचाया।

सवरिनलोकनृत्य का धमाल

चौपालपर श्रीलंका के कलाकारों ने अपनी दो नई लोक नृत्यों की प्रस्तुति से समां बांध दिया। दर्शकों की भीड़ इन नृत्यों को टकटकी लगाए देखती रही। श्रीलंका का सवरिन लोकनृत्य प्राचीन काल से राजा काे प्रसन्न करने के लिए किया जाता रहा है। प्राचीनकाल में इस नृत्य पर प्रसन्न होकर राजा नर्तकों को पुरस्कार से सम्मानित करता। इस नृत्य को 5 महिला डांसर करती हैं। इसमें एक स्टिक सजी होती है। उस स्टिक को केंद्र में रखकर ही दैविक नृत्य इस डांस में किया जाता है। यह नृत्य कुछ भारतीय क्लासिकल नृत्य से भी मेल खाता है।

पांथेरूनृत्य ने भी छटा बिखेरी

श्रीलंकामें यह लोकनृत्य महात्मा बुध के समय से किया जा रहा है। श्रीलंका की एक दैवी ने महात्मा बुध को प्रसन्न करने के उद्देश्य से इस नृत्य की उत्पत्ति की थीं। जिससे उनकी कृपा यहां के निवासियों पर बनी रहे। इसके तहत ही इस नृत्य की श्रीलंका के पुरुष कलाकारों ने मेले में प्रस्तुति दी। जिसे दर्शकों ने काफी सराहा।

फोटोग्राफीका उठाया लुत्फ

दर्शकोंने मेले में फोटोग्राफी का जमकर लुत्फ उठाया। विभिन्न द्वारों पर खड़े होकर अपने दोस्तों परिवार के सदस्यों की फोटोग्राफी करते लोग देखे गए। फोटोग्राफी के प्रति युवाओं में काफी क्रेज नजर आया। मेले में कोई अपने कैमरे तो कोई अबने मोबाइल से फोटो खींच रहा था।

कालबेलियाका चला जादू

कालबेलिया,राजस्थान की एक प्रसिद्ध नृत्य शैली है। यह सपेरा जाति का नृत्य है। इसमें गजब का लोच और गति है जो दर्शक को सम्मोहित कर देती है। यह नृत्य दो महिलाओं द्वारा किया जाता है। नर्तक घेरदार काला घाघरा पहनती है। जिस पर कसीदा होता है। कांच लगे होते हैं और इसी तरह की ओढ़नी और कांचली-कुर्ती होते हैं। राजस्थानी लोक गीतों पर ये बीन और डफ की ताल पर फिरकनी की तरह नाचती हैं तो देखने वाले के मुंह से वाह निकले बिना नहीं रहता। लोगों का हुजूम इस संगीत पर की गई प्रस्तुति को देखने के लिए उमड़ पड़ा।

बीनऔर नगाड़े ने बांधा समा

मेलापरिसर में शनिवार को युवाओं के थिरकने के लिए जगह-जगह इंतजाम किए गए थे। इसमें पानीपत से आई बीन पार्टी और बंचारी के नगाड़े की थाप ने समां बांधे रखा। युवा इन पर जमकर थिरके।

आजा मेरे संग झूम ले : बेलारूसके कलाकारों ने जब चौपाल पर प्रस्तुति दी तो दर्शक भी झूम उठे।

मेला देखने उमड़ी भीड़ : शनिवारको छुट्टी की वजह से सूरजकुंड मेला देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इससे मेला परिसर में जहां तक नजर पड़ी वहां लोगों का हुजूम दिखाई पड़ा।

मैं नागिन डांस नचणा : सूरजकुंडमेले में सपेरों की बीन की धुन कलाकारों संग जमकर थिरकी युवती।

जरा झूम ले : चौपालपर श्रीलंका की कलाकार ने अपने सवरिन नृत्य से सभी का दिल जीत लिया।