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रजिस्ट्रियां बंद होने से हड़कंप,राजस्व का नुकसान

7 वर्ष पहले
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जिलेमें अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्रियों पर रोक से करोड़ों रुपए दाव पर लग गए हैं। इस आदेश के बाद केवल कॉलोनाइजर बल्कि प्लॉट धारकों में भी हड़कंप है। अनुमान के मुताबिक प्लॉट की खरीद-फरोख्त को लेकर 100 करोड़ से अधिक रुपए का लेनदेन खतरे में पड़ा गया है। रजिस्ट्री होने से कॉलोनाइजर प्लॉटधारक बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। तय समय पर एग्रीमेंट की राशि जमीन मालिकों को देनी पड़ रही है। उधर, प्लॉट की रजिस्ट्रियां बंद होने से खरीद-फरोख्त रुक गई है। रजिस्ट्रियां बंद होने से सरकार को भी करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है।

अबहो रहा भारी नुकसान : करीबदो माह से अवैध कॉलोनियों में की जाने वाली रजिस्ट्रियां बंद हैं। जबकि दर्जनों गांवों में काफी कॉलोनियों में प्लाटिंग की जा चुकी है। कॉलोनाइजर एग्रीमेंट कर चुके हैं। अब एग्रीमेंट में दिए गए समय पर प्लॉट की रजिस्ट्री होने के कारण प्लॉटधारक अपने पैसे वापस मांग रहे हैं। इसके अलावा कॉलोनाइजरों को एग्रीमेंट के हिसाब से जमीन मालिक को भी पूरी पेमेंट देनी पड़ रही है। पेमेंट होने से कॉलोनाइजरों को मोटे ब्याज पर पैसा उठाना पड़ रहा है। जबकि प्लॉट बिक नहीं रहे हैं। इस चक्कर में प्लॉटधारक कॉलोनाइजरों को भारी नुकसान हो रहा है। कॉलोनाइजर बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

पहलेहो जाती थीं रजिस्ट्रियां: नियमानुसारअवैध कॉलोनी में प्लॉटों की रजिस्ट्री कराने से पहले जिला नगर योजनाकार इंफोर्समेंट विभाग की एनओसी (नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट) की जरूरत होती है लेकिन तहसील में बैठे अधिकारी बगैर एनओसी के ही रजिस्ट्री कर देते थे। जिला नगर योजनाकार दफ्तर से कई बार तहसीलदारों को लिखकर दिया जा चुका है कि रजिस्ट्री की एक कॉपी उनके दफ्तर में भी भेजी जाए लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है। शेषपेज 15 पर









इसकारण जिले में काफी संख्या में अवैध कॉलोनियां पनप रही हैं।

क्या है नियम

हरियाणा डेवलपमेंट रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरिया एक्ट 1975 के तहत जिस एरिया में धारा 7ए लागू होती हैं उस एरिया में बगैर जिला नगर योजनाकार इंफोर्समेंट की एनओसी के रजिस्ट्री नहीं की जा सकती। इस धारा से बाहर के इलाके में एनओसी की जरूरत नहीं है। ढाई एकड़ से कम भूमि की रजिस्ट्री के लिए एनओसी की जरूरत होती है। ढाई एकड़ इससे अधिक भूमि की रजिस्ट्री बिना एनओसी के की जा रही है।

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