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उद्योगों की आवश्यकतानुसार इंजीनियरिंग पाठयक्रम में सुधार जरूरी : यादव

7 वर्ष पहले
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उद्योगोंकी आवश्यकतानुसार इंजीनियरिंग पाठयक्रम में सुधार आवश्यक है। आज केवल 17 प्रतिशत छात्र स्नातकोत्तर एवं मात्र एक प्रतिशत ही रिसर्च में जाते हैं। जो हमारे 36 हजार कालेजों में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों पर एक गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। इंजीनियरिंग पास कर आने वाले युवकों में से केवल 25 प्रतिशत उपयुक्त रोजगार प्राप्त करने में सफल होते हैं। क्योंकि युवा वर्ग में योग्यता की कमी महसूस की जाती है। यह कहना था वाईएमसीए यूनिवर्सिटी आॅफ साइंस एंड टेक्नालॉजी के वायस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल केएस यादव का। वे इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियरिंग इंडिया के स्थानीय सेंटर द्वारा आयोजित 47वें इंजीनियर्स डे के अवसर पर मौजूद थे। देश के इंजीनियरिंग कालेजों से इंजीनियर बनकर निकल रहे युवाओं में सामान्य ज्ञान, आधुनिक तकनीक की जानकारी होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उद्योगों की आवश्यकतानुसार पाठयक्रम में सुधार आवश्यक है। दलाई लामा का कथन उद्घृत करते कहा कि अधिक डिग्रियों का अर्थ कम ज्ञान जानकारी बताया जा रहा है। उन्होंने कहा प्रतिभावान शिक्षक ही प्रतिभावान इंजीनियर्स बना सकता है। इंजीनियर में बदलते परिवेश की तकनीक के प्रति जागरूक, समाज को सुरक्षित रखने की भावना, एक अच्छा इंजीनियर ही नहीं बल्कि एक उत्तम मानव बनने की भावना भी होनी चाहिए।

रिसर्च का कार्य किसी एजेंसी के जिम्मे लगाकर विश्वविद्यालयों के हवाले किया जाना चाहिए। पर्यावरण की रक्षा, कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी का ध्यान भी विकास के साथ-साथ रखा जाना आवश्यक है। मानव रचना इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डा. एनसी वधवा ने भारत के प्रथम इंजीनियर डा. एम विश्वेश्वरैया का वर्णन करते कहा कि इंजीनियर्स का क्षेत्र उनकी महान देन है।

सेंटर के चेयरमैन जेपी मल्होत्रा ने कहा कि विश्वस्तरीय तकनीक ज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करना, समस्याओं के समाधान के लिए इंजीनियरिंग के ज्ञान को बढ़ावा देना, चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाना स्किल में बढ़ावा देने हेतु उपक्रम सेंटर के मुख्य उद्देश्य रहे हैं। इस अवसर पर मेकिंग इंजीनियरिंग वर्ल्ड क्लास विषय पर व्याख्यान का आयोजन भी किया गया।