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सोशल साइट गेम्स से युवाओं को लुभाने में जुटे नेताजी

7 वर्ष पहले
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विधानसभाचुनाव में इस बार सोशल साइट गेम्स पार्टी प्रचार के नए माध्यम बने हैं। इनके जरिए लोगों को अपनी ओर खींचने की पार्टियां पुरजोर कोशिश कर रही हैं। गेम्स ग्रुप तक तैयार करने से पार्टियां पीछे नहीं हट रही हैं। सोशल साइट्स पर इसके तहत अलग से वेबसाइट तैयार की जा रही है। नेताओं ने आईटी एक्सपर्ट की टीमें भी हायर की हुई हैं। लोगों द्वारा भी ये गेम्स पसंद किए जा रहे हैं। इनका भरपूर लुत्फ उठा रहे हैं। वहीं इसके जरिए पार्टी को अपने आकलन का भी पता चल रहा है।

किसप्रकार के गेम्स

गोलीबाजगुलाबी गैंग, गुलाबी गैंग केंडी, कैरेक्टर गेम्स जैसे प्रधानमंत्री मोदी, मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, चिदंबरम, महंगाई डायन इत्यादि थीम पर ये गेम्स सोशल साइट्स पर लाए गए हैं। खास बात ये है कि कहने को ये गेम्स है, लेकिन इसका सीधा मकसद अपनी पार्टी का प्रचार करना है। गेम्स समाप्त होने पर पार्टी का उद्देश्य संबंधित गेम्स खेलने वाले से लाइक-अनलाइक के जरिए पूछ लिया जाता है। वहीं वोट की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उसे जागरूक किया जा रहा है।

येगेम्स बने पसंदीदा

सोशलसाइट्स पर हुड्डा सरकार पर आधारित गुलाबी गैंग केंडी, नरेंद्र मोदी करेक्टर गेम्स, महंगाई डायन और मनमोहन-राहुल कैरेक्टर पर आधारित गेम्स लोगों के पसंदीदा बने हैं। चुनावी गेम्स वार में खासकर नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का तो कोई सानी नहीं है। इन गेम्स को सोशल साइट्स पर लगातार हिट्स मिल रहे हैं। ग्रुप में भी ये गेम्स खेले जा रहे हैं।

येहै नेताओं का कहना

भाजपापार्षद ओमप्रकाश रक्षवाल के अनुसार उन्हें तो मोदी का गेम्स बहुत पसंद आया है। उन्हें सोशल साइट्स पर रिक्वेस्ट आई। उसे उन्होंने कन्फर्म कर दिया। यह नया तरीका युवाओं को आकर्षित करने का बना है। कांग्रेसी पार्षद योगेश ढींगरा का कहना है कि मर्यादा से हटकर इस तरह के प्रचार को वे उचित नहीं मानते हैं। लेकिन इससे कम पैसों में बहुत अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

गेम्सभेजने का तरीका

एकपार्टी के सदस्य ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि सोशल साइट्स पर पहले एक रोचक वेबसाइट का निर्माण कराया जा रहा है। उस पर अपने प्रचार के तहत गेम डेवलपर कंपनी से गेम्स बनाकर लोड करा दिए जा रहे हैं। फिर इन वेबसाइट की सोशल साइट्स पर बने विभिन्न ग्रुप को रिक्वेस्ट फारवर्ड की जा रही