रामभक्त ले चला रे राम की निशानी...
रामभक्त ले चला रे राम की निशानी, शीश पे खड़ाऊ हैं अंखियों में पानी, शीश पे खड़ाऊ ले चला ऐसे, राम-सिया ही संग हो जैसे, अब इनकी छांव में रहेगी राजधानी… ऐसे ही मधुर संगीत के साथ रंगमंच की रामलीला में राम-भरत का मिलाप दिखाया गया। इसमें भरत के अनुरोध करने पर भी जब राम रघुवंश के वचनों का मान रखते हुए लौटने से इंकार कर देते हैं तो भरत उनकी चरण पादुका को शीश पर लिए अयोध्या वापस लौटते हैं। शहर की अलग-अलग रामलीलाओं में अलग-अलग दृश्यों का मंचन किया गया।
सिरपर पादुका लेकर लौटे भरत
एनएच-1की विजय रामलीला कमेटी की रामलीला में भरत के पास दशरथ के प्राण त्यागने का समाचार पहुंचता है। वे अपने ननिहाल से वापस आते हैं। वे अपनी मां को कोसते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। वे कहते हैं कि अपने भाई के अलावा उन्हें कोई राज-पाठ की इच्छा नहीं है। भरत भगवान राम को वापस लाने के लिए वन की ओर कूच करते हैं। लेकिन राम वापस लौटने से इंकार कर देते हैं। ऐसे में भरत राम की चरण पादुका शीश पर रख अयोध्या वापस लौटते हैं। भरत की भूमिका अरुण भाटिया ने शानदार अभिनय किया।
छलसे किया रावण ने सीता का हरण
जागृतिरामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला में सीता हरण के दृश्य में मोहनी का रूप धरकर राम के पास शूर्पणखा विवाह प्रस्ताव लेकर आती है। लेकिन राम उसे लक्ष्मण के पास भेज देते हैं। लक्ष्मण भी इस प्रस्ताव से इंकार कर देते हैं। ऐसे में क्रोध में आकर वह सीता की आेर आक्रमण का प्रयास करती है। ऐसे में लक्ष्मण शूर्पणखा की नाक काट देते हैं। शूर्पणखा यह समाचार लेकर रावण के पास पहुंचती है। वह रावण के सीता के सौंदर्य के बारे में बताती है। रावण सीता हरण की योजना बनाता है। अपने मामा को हिरण बन राम की कुटिया के सामने भेजता है। सीता हिरण की सुंदरता को देख उसे पकड़कर लाने का आग्रह करती है। राम उसका शिकार करने निकल जाते हैं। बाद में सीता लक्ष्मण को राम की सहायता के लिए भेजती है। लक्ष्मण कुटी के सामने रेखा खींचकर चले जाते हैं। इस बीच रावण का साधु का भेज बन सीता से से भिक्षा मांगता है। सीता भिक्षा देने जैसे ही बाहर आती है रावण उनका हरण कर लेता है। सीता की भूमिका अंकुश गांधी रावण की भूमिका में दिलबाग सिंह ने अपनी कला में पूरी जान डाली।
रामबारात सीता वनवास : श्रीधार्मिक लीला कमेटी एनआईटी-5 नंबर की रामलीला में पहले धूमधाम से राम