सूरजकंुड मेला
टूटे नारियल से भाग्योदय, बने आर्टिस्ट
नारियल से चीजें बना जीता नेशनल अवार्ड, नारियल से बनाते हैं कई प्रकार की चीजें।
टूटा नारियल और हुआ भाग्योदय! आप सोच रहे होंगे कि नारियल के टूटने से भाग्य उदय कैसे हो सकता है, लेकिन बिहार के निकुंज बिहारी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। 25 साल पहले नारियल के टूटने पर ही उन्हें उसे नए रूप में ढालने का विचार आया। इस विचार के बाद वह अपने को एग्रो आर्टिस्ट के रूप में स्थापित कर चुके हैं। 2008 में नेशनल अवार्ड से नवाजे गए हैं। नाबार्ड ने उनकी कला को समझा और उन्हें आधुनिकीकरण के तहत फाइनेंशियल सपोर्ट की। अब इनके सामानों की विदेशों में भी धूम है। इस मेले में नाबार्ड की ओर से ही वह अपनी यूनिक कला का नमूना पेश कर रहे हैं। उनके साथ उन्हीं से शिक्षा प्राप्त मालाकुमारी वर्मा आई हैं, जिन्हें भी 2011 में स्टेट अवार्ड मिल चुका है।
कभीरोटी के थे मोहताज : निकुंजकहते हैं कि पहले वे मेडिकल स्टोर में कार्य करते थे। उसी से घर का गुजारा चलता था। उन्हें शुरू से ही कचरा जमा करने का शौक था। कचरा यानि पुराना टूटा-फूटा सामान। एक समय ऐसा भी आया कि उन्हें रोटी के लिए भी तरसना पड़ा। ऐसे ही मंदिर में बैठे थे कि किसी ने नारियल तोड़ा। तो टूटे हुए नारियल का गोल भाग उनके पास गया। इसके बाद उस भाग में उन्होंने पुरानी घड़ी का कब्जा लगाकर एक पॉट बना दिया। उनके एक दोस्त को वह बहुत पसंद आया। इसके बाद उन्होंने एक और नारियल लिया। उस पर भी इसी प्रकार कलाकारी कर पॉट बनाया। इस प्रकार उनके दोस्तों की मांग के अनुसार वह नारियल को उस चीज में ढालने लगे। वैसे वे प्रोफेशनल नहीं थे। लेकिन उनकी बनाई चीजें उनके दोस्तों को खूब पसंद आतीं। निकुंज बताते हैं कि फिर उनका यह कार्य नशा बन गया। अभी तक वह किचन, सजाने, ज्वैलरी एवं विभिन्न प्रकार के 5 हजार से अधिक आइटमें बना चुके हैं। इन्हीं आइटमों का 20 फीसदी वे मेले में लेकर आए हैं।
शेषपेज 15 पर
इनकाकहना है कि इनके बनाए किचन के सामान में म्वाइस्चर नहीं आता। वे यहां पर 30 रुपए से लेकर 2 हजार रुपए तक का सामान लेकर आए हैं।
लॉक वाली गुल्लक से प्रसिद्धि
निकुंज की लॉक वाली गुल्लक वर्ल्ड में पेटेंट हैं। इसमें नंबर वाले लॉक लगे हैं। नारियल की इस गुल्लक को बनाने वाले वह दुनिया में एक मात्र आर्टिस्ट हैं। जबकि गणपति-शिव की बनाई मूर्ति के तहत उन्हें नेशनल अवार्ड से नवाजा गया है।
150 लोगों को बना चुके हैं आर्टिस्ट
निकुंज150 लोगों को आर्टिस्ट बना चुके हैं। उन्हें अपने साथ जोड़कर उनके परिवार को रोजी-रोटी मुहैया करा रहे हैं। नाबार्ड से मदद मिलने के बाद उन्होंने प्रणव प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की इन सभी आर्टिस्ट को लेकर संस्था बनाई है। केरला कोकोनट बोर्ड से भी उन्हें अब मदद मिल रही है। उनका कहना है कि फिलहाल उनका सामान देश में ही खप जाता है। विदेशों में मुश्किल से 10 फीसदी जा पाता है। इसका कारण वे आर्टिस्टों की कमी बताते हैं। लेकिन अब विदेशों में भी उनके सामान की मांग बढ़ रही है। इससे नाबार्ड से मदद लेकर इस संस्था का निर्माण किया है, ताकि ज्यादा लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा सके।
शिल्पकार निकुंज बिहारी माला कुमारी नारियल से बनी कलाकृति दिखाते हुए।