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बिजली निगम का खेल, चोरी पकड़ी लेकिन एड्रेस फेल

6 वर्ष पहले
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बिजलीनिगम ने चोरी के कई मामले पकड़ तो लिए हैं। लेकिन जुर्माना वसूलने के लिए पुलिस को उपभोक्ताओं के जो पते दिए गए हैं वे अब नहीं मिल रहे हैं। बिजली चोरी के करीब ऐसे 200 मामले हैं। इन उपभोक्ताओं के खिलाफ बिजली थाने में एफआईआर दर्ज है। पुलिस जब इनके एड्रेस पर रिकवरी के लिए जाती है तो वहां पता गलत निकल रहे हैं। जो एड्रेस पुलिस को बिजली निगम की तरफ से दिए गए। उन पर दूसरे उपभोक्ता रह रहे हैं। ऐसे में पुलिस को इन मामलों में कार्रवाई करने में काफी दिक्कत रही है। साथ ही जुर्माने की लाखों रुपए की रिकवरी भी नहीं हो रही है।

200से अधिक मामले अनट्रेस : बिजलीथाने में ऐसे एक-दो नहीं 200 से भी अधिक मामले हैं। जिनमें एड्रेस गलत हैं। इस बात का खुलासा तब हुआ जब बिजली थाने की पुलिस ने जांच के लिए मौका मुआयना किया। शेषपेज 15 पर





ऐसेमें ये मामले ट्रेस नहीं हो रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि जब सबडिवीजन की टीम खुद जाकर मौके पर बिजली चोरी पकड़ती है तो एड्रेस कैसे गलत हो सकता है। वजह चाहे जो भी लेकिन इस पूरे मामले में पुलिस के साथ उन ईमानदार उपभोक्ताओं को भी परेशान होना पड़ रहा है। जो इन गलत एड्रेस का शिकार हो रहे हैं। पुलिस गलत एड्रेस पर पहुंचकर उन उपभोक्ताओं से पूछताछ करती है।

अटकी लाखों की रिकवरी

बिजली निगम जब किसी उपभोक्ता को बिजली चोरी करते हुए पकड़ता है तो एलएल-1 फार्म भरकर उपभोक्ता को नोटिस दिया जाता है। इसमें चोरी के लोड का आकलन कर उस पर जुर्माना तय किया जाता है। जुर्माना राशि भरने के लिए उसे 48 घंटे का समय दिया जाता है। जुर्माना जमा करने पर उसके खिलाफ बिजली थाने में एफआईआर दर्ज कर ली जाती है। पिछले साल भी सैकड़ों उपभोक्ताओं के खिलाफ बिजली चोरी के केस बनाए गए। इनमें से एफआईआर दर्ज कराते समय बिजली चोरों का जो पता दिया गया उनमें से करीब 200 उपभोक्ताओं का एड्रेस ट्रेस नहीं हो पाया है। ऐसे में उनसे लाखों रुपए की रिकवरी अटकी पड़ी है।

मांगी जा रही सबडिवीजन से मदद

बिजली चोरों का एड्रेस ट्रेस नहीं होने से बिजली थाने की ओर से संबंधित एसडीओ को लेटर भी भेजे जा रहे हैं। इनमें से एक मथुरा रोड सबडिवीजन भी है। इसमें थाने की ओर से लेटर भेजकर 37 अनट्रेस उपभोक्ताओं का एड्रेस ट्रेस करने के लिए जेई की मदद मांगी गई है। साथ ही लेटर में यह भी लिखा गया है अगर जेई मदद नहीं करते हैं तो 37 बिजली चोरों से रिकवरी के लिए बिजली थाना जिम्मेदार नहीं होगा। इन 37 उपभोक्ताओं पर बिजली निगम का 5 लाख 72 हजार 485 रुपए जुर्माना बकाया है। उपभोक्ताओं का एड्रेस ट्रेस होने से इनकी रिकवरी नहीं हो पा रही है।

{एड्रेस गलत होने के कारण लाखों रुपए की रिकवरी अटकी