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मेले में कीजिए सांझी कला का दीदार

6 वर्ष पहले
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फरीदाबाद | सांझीकला को यदि आप देखना चाहते हैं तो सूरजकुंड मेले में देख सकते हैं। उत्तर प्रदेश के हट नंबर 572 के संचालक विजय कुमार वर्मा के अनुसार यह आर्ट बहुत पुरानी है। यह कला मथुरा से आई और भगवान श्रीकृष्ण से प्रभावित है। वर्मा वर्ष 1987 से लगातार यहां रहे हैं। इस कला के लिए उन्हें मेला प्राधिकरण द्वारा कलामणि अवार्ड से नवाजा जा चुका है। उन्होंने इस कला के बारे में बताया कि यह धीरे- धीरे पेपर पर चली। बाद में बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हो गई। वर्मा के अनुसार इस कला को वे स्कूलों में भी बच्चों को सिखाते हैं। इस कला के माध्यम से विभिन्न साइजों के बेहतर किस्म की वाल हैंगिंग तैयार की जा रही है। वर्मा के अनुसार उन्होंने बड़े साइज आकार के स्क्रीन और पार्टिशन को भी काटा है। इसका दाम 200 से लेकर 40 हजार रुपए तक है। मेले में स्टाल नंबर 951 में महाराष्ट्र की सिल्क काटन फैब्रिक साड़ियों की विभिन्न रेंज हैं। स्टाल संचालक प्रवीन वाडवे के अनुसार उनके पास विशेष तूसार सिल्क विद्रभा साड़ी है, जो तीन बार्डर की बुनाई के साथ उपलब्ध है। ब्लाक प्रिंटिंग ट्राइवर साड़ी महेश्वरी शुद्ध जरी की साड़ी भी उपलब्ध है। इन साड़ियों का दाम दो हजार रुपए से शुरू होता है।