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बच्चों को 40 साल से खुशियां बांट रही लक्ष्मी
फरीदाबाद |खिलौनों केमाध्यम से लक्ष्मी 40 साल से बच्चों को खुशियां बांटने में लगी हैं। उनका कहना है कि आजकल की इस भागदौड़ में बचपन का मायना बदलता जा रहा है। आज बच्चे उन खिलौनों के साथ खेलते हुए नजर नहीं आते, जिनके साथ पहले देखा जाता था। आज बच्चे इंटरनेट गेम, मोबाइल गेम, टीवी गेम, टेबलेट गेम आदि पर खेलते हुए नजर रहे हैं। ये गेम एनिमेटेड हैं। आज के दौर की शायद मांग भी यही है। लेकिन इस सबके बावजूद सूरजकुंड मेले में प्राकृतिक लकड़ी से तैयार खिलौनों को स्टाल नंबर 260 पर देखा जा सकता है। स्टाल की संचालक लक्ष्मी बंगलुरू से 60 किलोमीटर दूर चन्ना पटना की रहने वाली हैं। लक्ष्मी के अनुसार इन खिलौनों को तैयार करने में एक विशेष प्रकार की दूधी की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। यह एक टन लकड़ी चार हजार रुपए में मिलती है। इससे तैयार किए जाने वाले खिलौनों पर प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जाता है, जो पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं। स्टाल पर लकड़ी की रंग-बिरंगी चूड़ियां, खिलौने, ट्रेन, एयर प्लेन, किचन सेट, गिनती सेट, बैलगाड़ी, इंजन, रोटेट वाल, कार, घोड़ा, खरगोश, की रिंग, रोप, यो-यो, बैल, सिटी, अगरबत्ती स्टैंड, गुड़िया, झूमर और भगवान की मूर्तियां उपलब्ध हैं। उनके यहां 20 से लेकर 500 रुपए तक के आइटम हैं।
लक्ष्मी के अनुसार उन्हें अभी तक कोई अवार्ड नहीं मिला है, फिर भी अपनी कला से वे प्रयासरत हैं और इस कार्य में वे 40 साल से जुड़ी हैं। मेले में भी लगातार 7 साल से रही हैं। उनका कहना है कि वे इस धंधे के माध्यम से बच्चों को खुशियां लुटा रही हैं। यही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है। लक्ष्मी के अनुसार अभी तक कोई खास बिक्री नहीं हुई है। लेकिन उम्मीद है आने वाले दिनों में ठीक ठाक बिक्री होगी।