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सेमिनार: शिक्षा के आधुनिक संदर्भ को प्रासंगिक बनाने पर दिया जोर
औरंगाबादएडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम-पुनरावलोकन गुणवत्ता मानदंड विषय पर नैक बंगलुरू द्वारा प्रायोजित दो-दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसके दूसरे दिन दयालबाग शिक्षण संस्थान आगरा के प्रो. केसी वशिष्ठ ने सेमिनार में शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम को आधुनिक संदर्भों में प्रासंगिक बनाने पर जोर दिया। इस दौरान आधुनिक भारत में शिक्षक की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के चेयरमैन विनय गुप्ता, निदेशक प्रो. आरएस चौधरी, प्राचार्य डा. लक्ष्मी शर्मा आमंत्रित शिक्षाविद द्वारा शिक्षा की आद्य देवी सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई। संगोष्ठी में एनसीईआरटी दिल्ली के प्रो. आरएल फुटेला, लालबहादुर राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ नई दिल्ली की डॉ. अमिता पांडे, हिंदू कॉलेज ऑफ एजुकेशन, सोनीपत की डॉ. प्रवीण शर्मा अन्य शिक्षाविदों ने वर्तमान शिक्षक शिक्षा एवं उसकी गुणवत्ता संबंधी मानदंडों पर विचार रखे। एमडी यूनिवर्सिटी रोहतक के शिक्षा विभाग की डीन डॉ. हेमंतलता शर्मा ने विदाई भाषण के तौर पर शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के परिप्रेक्ष्य में अपने विचार रखे।
उन्होंने इसकी गुणवत्ता मानदंडों पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से आए 135 छात्र, शोधार्थी एवं शिक्षकों ने अपने-अपने पत्र प्रस्तुत किए गए। संगोष्ठी के समापन पर संस्थान की प्राचार्य डॉ. लक्ष्मी शर्मा ने देश के विभिन्न भागों से आए समस्त छात्रों, शिक्षकों एवं शिक्षाविदों का आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद दिया। साथ ही संस्थान के प्रबंध तंत्र का भी आभार जताया और कहा कि इस संगोष्ठी को सफलता तक पहुंचाने में संस्थान प्रबंध तंत्र का सहयोग सराहनीय है। सेमिनार का संचालन संस्थान की सहायक प्रो. अरविन्दर कौर द्वारा किया गया।