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ईएसआई मेडिकल कॉलेज को राज्य सरकार को देने पर फिलहाल रोक
ईएसआईमेडिकल कालेज को राज्य सरकार को देने की पेशकश पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। ईएसआई मेडिकल कालेज को राज्य सरकार को देने की पेशकश पर एटक कर्मचारी संगठनों की ओर से भारी विरोध किया जा रहा है। इनका मानना है कि राज्य सरकार के अधीन चल रहे ईएसआई अस्पतालों की हालत दयनीय है। ऐसे में मेडिकल कालेज को राज्य सरकार को सौंपना मजदूर कर्मचारियों के लाखों परिवारों के साथ मजाक होगा। इस मामले को लेकर दिल्ली में हुई कारपोरेशन की मीटिंग में एटक के भारी विरोध के बाद फिलहाल इस फैसले पर रोक लगा दी गई है।
कारपोरेशनने की थी पेशकश
ईएसआईकारपोरेशन ने 31 जुलाई को लेटर जारी कर पेशकश की थी कि जो भी राज्य सरकार अपनी इच्छा से मेडिकल कालेज को अपने अधीन लेना चाहती है वह ले सकती है। इस फैसले के आने के बाद से कर्मचारी संगठन एटक की ओर से लगातार इसका विरोध किया जा रहा था। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह फैसला कर्मचारी मजदूरों के साथ मजाक है। खासतौर पर फरीदाबाद में। जहां अभी मेडिकल कालेज पूरी तरह बनकर भी तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में केंद्र के इस फैसले से कर्मचारी संगठन खफा हैं।
ईएसआईअस्पताल के बुरे हाल
अभीराज्य सरकार के अधीन चल रहे ईएसआई अस्पताल की हालत बेहद खराब है। इससे मरीजों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। इन समस्याओं को लेकर रीजनल बोर्ड की मीटिंग में समय-समय पर सदस्य यह मुद्दा उठाते रहे हैं। लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं हो रही। शेषपेज 15 पर
अस्पतालमें स्टाफ की कमी है। इससे यहां आने वाले मरीजों को खासी दिक्कत होती है। ऐसे में जब ईएसआई कारपोरेशन के अंडर मेडिकल कालेज का काम शुरू हुआ तो लाखों मजदूर कर्मचारी उनके परिवारों को उम्मीद जगी कि अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। लेकिन मेडिकल कालेज को राज्य सरकार को देने के फैसले से लाखों कर्मचारी-मजदूर परिवारों को निराशा हुई।
मीटिंग में विरोध के बाद रोक
ईएसआईकारपोरेशन की दिल्ली में हुई मीटिंग में रीजनल बोर्ड के सदस्यों एटक के कर्मचारी नेताओं ने काफी विरोध किया। इसे देखते हुए फिलहाल कारपोरेशन की ओर से इस पर रोक लगा दी गई है। ईएसआई कारपोरेशन रीजनल बोर्ड के सदस्य एटक की राष्ट्रीय सचिव अमरजीत कौर के अनुसार मीटिंग में इस फैसले का विरोध किया गया। उन्होंने कहा विरोध के बाद मीटिंग में निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार के अधी