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धन के नहीं, प्रेम के भूखे हैं भगवान : प्रकाश

7 वर्ष पहले
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भगवानराम भाव के भूखे हैं। गरीब हो या अमीर जो भक्ति भाव से अभिमान त्याग कर श्रीराम की पूजा करता है मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम उसकी प्रत्येक मनोकामना पूरी करते हैं। कलियुग में केवल राम नाम का ही सहारा है। यह कहना था जगत प्रकाश महाराज का। वे मानव सेवा समिति की ओर से चल रही श्रीरामकथा में प्रवचन दे रहे थे। इस दौरान भजनों पर महिलाओं ने जमकर नृत्य किया।

महाराज ने कहा कि दान देकर, भक्ति करके उसका बखान करना निंदनीय है। ऐसा करने से फल की प्राप्ति नहीं होती है। राम राज की कल्पना का यह अर्थ होता है। ऐसा राज्य जिसमें गरीब, अमीर सभी सुखी हों। राजा प्रत्येक प्रजा का ख्याल रखे। ईमानदारी उस राज्य में प्रत्येक में हो और किसी को कोई कष्ट हो। ऐसे ही राम राज्य की स्थापना हमारे देश में होनी चाहिए। इस दौरान राम, लक्ष्मण, सीता की सुंदर झांकी आकर्षण की केंद्र रही। शनिवार को कथा में शहर के समाजसेवी दानी सज्जन अजय गुप्ता, रूप राम गर्ग, विनय गुप्ता, अनिल गर्ग, हरिओम गुप्ता, सुंदर गौरी सरिया, जितेंद्र मंगला, मदन गोयल, राजन अग्रवाल, दीपक पठनी, सुंदर जिंदल, समाजसेविका गीता बंसल, सीआर गुप्ता आदि मौजूद थे।