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फ्लैट कैंसिल के नोटिस मिलने पर निवेशकों का फूटा गुस्सा बिल्डर के खिलाफ डीसी सहित कई अधिकारियों के दफ्तर पर प्रदर्शन / फ्लैट कैंसिल के नोटिस मिलने पर निवेशकों का फूटा गुस्सा बिल्डर के खिलाफ डीसी सहित कई अधिकारियों के दफ्तर पर प्रदर्शन

Bhaskar News Network

Jul 22, 2015, 02:00 AM IST

Faridabad News - फरीदाबाद- सेक्टर 21 स्थित पुलिस कमिश्नर के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते नहर पार के निवेशक। भास्कर न्यूज |...

फ्लैट कैंसिल के नोटिस मिलने पर निवेशकों का फूटा गुस्सा 
 बिल्डर के खिलाफ डीसी सहित कई अधिकारियों
फरीदाबाद- सेक्टर 21 स्थित पुलिस कमिश्नर के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते नहर पार के निवेशक।

भास्कर न्यूज | फरीदाबाद

ग्रेटरफरीदाबाद स्थित पीयूष हाइट्स के निवेशकों ने फ्लैट कैंसिल के नोटिस मिलने के विरोध में मंगलवार को सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय में प्रदर्शन कर बिल्डर के खिलाफ नारेबाजी की। इन्होंने डीसी, एसडीएम, डीटीपी और बाद में पुलिस कमिश्नर दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। ये सुबह से लेकर दोपहर तक इन दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन करते रहे। ये लोग पहले डीसी से मिले। इसके बाद एसडीएम, डीटीपी पुलिस कमिश्नर से मिले। अब 27 जुलाई को निवेशकों बिल्डर की एसडीएम के सामने पेशी होगी। उसके बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

क्याकहते हैं निवेशक

पीयूषहाइट्स अपार्टमेंट अलॉटी सोसायटी के प्रधान तुलींद्र कटोच, सचिव सुरेश पाल सिंह, धीरेंद्र सिंह, आरसी गुप्ता, अनिल मित्तल, परमहंस, ओपी अग्रवाल के अनुसार सेक्टर-89 पीयूष हाइट्स में उनके सहित सैकड़ों लोगों ने 2006 से फ्लैट के लिए निवेश करना शुरू किया था। ये लोग यहां करोड़ों रुपए लगा चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें फ्लैट मिलने की उम्मीद काफी कम दिख रही है। क्योंकि अब बिल्डर की तरफ से फ्लैट कैंसिल के जो नोटिस भेजे जा रहे हैं उनमें उन लोगों पर 7 से 13 लाख रुपए तक बकाया बताए जा रहे हैं।

बिल्डर की इस कार्रवाई के विरोध में वे लोग सेक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय में सुबह 11 बजे पहुंचे। यहां सबसे पहले इन्होंने मेन इंट्री गेट पर प्रदर्शन किया। इसके बाद एसडीएम, डीटीपी पुलिस कमिश्नर दफ्तर में जाकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में विभिन्न मांगों को लेकर तख्तियां लिए हुए थे।

अबमामला एसडीएम के पास

तुलींद्रसुरेश पाल सिंह के अनुसार उन्होंने डीसी को शिकायत दी। डीसी ने निवेशकों को एसडीएम महावीर प्रसाद के पास भेज दिया। एसडीएम ने शिकायत देखने के बाद निवेशकों को 27 जुलाई को सुबह 10 बजे आने के लिए कहा है। एसडीएम ने निवेशकों से कहा कि 27 जुलाई को बिल्डर को भी बुलाया जाएगा। दोनों पक्षों का आमना-सामना होगा। उसके बाद रिपोर्ट डीसी के पास जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर डीसी कार्रवाई तय करेंगे।

सुविधाओंके नाम पर वसूली

निवेशकोंका आरोप है कि वर्ष 2006 से बिल्डर द्वारा तरह-तरह की सुविधाओं के नाम पर वसूली की जा रही है। कभी वाई फाई के नाम पर तो कभी ईडीसी, गैस कनेक्शन, सुपर एरिया, क्लब के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। फ्लैट की कीमत लगभग डेढ़ गुणा कर दी गई है। इस संबंध में समय-समय पर काफी शिकायतें अधिकारियों को दीं। लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। अब बिल्डर की तरफ से फ्लैट कैंसिल के नोटिस रहे हैं। उन सभी लोगों पर 7 से 13 लाख रुपए बकाया बताए जा रहे हैं जबकि वे एग्रीमेंट के समय की राशि के मुताबिक 95 फीसदी जमा करा चुके हैं। अभी तक 50 से अधिक निवेशकों को नोटिस मिल चुके हैं और यह सिलसिला अभी जारी है।

^कईबार निवेशकों से अपनी पूरी पेमेंट जमा करने के लिए कहा। लेकिन उन्होंने पैसे जमा नहीं किए। कई ऐसे फ्लैटधारक हैं जिन पर 13 लाख रुपए तक बकाया है। इसलिए ऐसे निवेशकों को नोटिस भेजे जा रहे हैंं। उन्होंने किसी भी नाजायज सुविधा के लिए पैसे नहीं मांगे। निवेशकों को उनके एरिया में बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैंं। इसमें कुछ गलत नहीं है। -अनिलगोयल, डायरेक्टर, पीयूष ग्रुप।

^दोनोंपक्षों से बात की जाएगी। इसकी रिपोर्ट एसडीएम तैयार करेंगे। उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए अब एक कमेटी बन गई है। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। डॉ.अमित कुमार अग्रवाल, डीसी।

{नहरपार ग्रेटर फरीदाबाद में आधा दर्जन से अधिक बिल्डर ऐसे हैं जिनके खिलाफ 50 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। उनमें एक को छोड़ किसी बिल्डर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

{ बिल्डरों के खिलाफ सैकड़ों शिकायतें पिछले पांच साल से जिला स्तर से लेकर चंडीगढ़ सरकार को भेजी जा चुकी हैं।

{ बिल्डरों के खिलाफ लगातार बढ़ती जा रही शिकायतों के मद्देनजर पूर्व डीसी डॉक्टर प्रवीण कुमार द्वारा 2011 में एक कमेटी का गठन किया गया था। इसमें डीसी खुद अध्यक्ष और एसडीएम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारी सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। अभी तक कमेटी द्वारा की गई जांच का नहीं पता और ही कमेटी द्वारा कोई सख्त निर्णय लिया गया है।

{ कई बिल्डरों ने लाइसेंस रिन्यू नहीं कराए हैं, निवेशकों द्वारा विभाग से लेकर सरकार तक इसकी शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं।

{ ईडीसी (बाह्य विकास शुल्क) के नाम पर बिल्डरों द्वारा की जा रही वसूली के खिलाफ सैकड़ों शिकायतें दी लेकिन अधिकारी सरकार मौन रही।

{ कई बिल्डरों के 2010 में पूरे होने वाले प्रोजेक्ट अभी तक अधूरे, संभावना है कि अभी नहरपार प्रोजेक्ट पूरे होने में अभी कई साल और लगेंगे।

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