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मुआवजा 42 से बढ़ाकर 62 लाख हुआ

5 वर्ष पहले
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ईस्टर्नपेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहण की गई नौ गांवों के 4000 किसानों को अब 42 लाख रुपए की बजाय 62 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा मिलेगा। यह फैसला एडीसी डा. आदित्य दहिया की अदालत ने सुनाया है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लिए नौ गांवों की 438 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई है। किसानों ने कम मुआवजा राशि को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 2008 में पलवल के 15 गांवों की 438 एकड़ और मोहना उपतहसील के नौ गांवों की 438 एकड़ भूमि अधिग्रहण की थी। तब इन किसानों का मुआवजा 16 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से तय किया था। यह मुआवजा कम था तो इसे लेकर किसान अदालत में चले गए। अदालत ने जमीन के भाव बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन को आदेश दे दिए। प्रशासन ने 24 लाख रुपए प्रति एकड़ मुआवजा तय किया तो फिर से किसान अदालत में चले गए। अदालत ने इस मुआवजे को कम बताया और प्रशासन को फिर से मुआवजा बढ़ाने के लिए कहा। प्रशासन ने मुआवजा 24 लाख से बढ़ाकर 42 लाख रुपए प्रति एकड़ कर दिया। किसान इस पर भी राजी नहीं हुए और वे अदालत में चले गए। अदालत ने इसकी सुनवाई के लिए फरीदाबाद और पलवल के अतिरिक्त उपायुक्त की अदालतों को जिम्मेदारी सौंप दी। पलवल के अतिरिक्त उपायुक्त ने मुआवजा 42 लाख रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर मुआवजा 62 लाख रुपए प्रति एकड़ कर दिया। अब फरीदाबाद के अतिरिक्त उपायुक्त डॉ आदित्य दहिया ने मोहना उप-तहसील के सभी नौ गांवों के किसानों का मुआवजा 62 लाख रुपए प्रति एकड़ घोषित कर दिया है। जिला भूमि अर्जन अधिकारी कुलबीर सिंह ढाका ने बताया कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लिए जो मुआवजा तय किया है, उसके अनुसार मांग-पत्र बनाया जा रहा है।

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