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पांच साल, 30 तारीखें और न्याय मिला आधा

5 वर्ष पहले
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उपभोक्ताफोरम में आए मामलों को अधिकतम चार महीने में निपटाने के आदेश हैं। इसके बावजूद सड़क हादसे में घायल होने के बाद डाक्टरों की लापरवाही से अपना दायां पैर गंवाने वाले एक युवक को न्याय के लिए पांच साल तक लड़ाई लड़नी पड़ी। कोर्ट में 30 तारीखों पर सुनवाई में पहुंचे। इसके बाद भी उसे जो न्याय मिला उससे वह संतुष्ट नहीं है। पीड़ित का कहना है अब मैं अपीलेट फोरम में जाऊंगा।

युवक ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम में अस्पताल प्रबंधन और डाॅक्टरों पर 19 लाख रुपए का मुआवजा देने का दावा किया था लेकिन फोरम ने उसे मात्र 9.14 लाख रुपए देने के आदेश दिए।

क्याहै मामला : नहरपारके वजीरपुर रोड की गली नंबर दो में रहने वाले राजकुमार एक निजी स्कूल की बस चलाते थे। 9 जून 2010 को वह बाइक से ड्यूटी जा रहे थे। इस दौरान वह सड़क हादसे में गिरकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए। उनके दाएं पैर में मल्टीपल फ्रेक्चर था। राजकुमार को पहले सेक्टर-19 स्थित सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें सेक्टर-8 स्थित सर्वोदय अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल के हड्‌डी रोग विशेषज्ञ डा. शैलेष जैन और वसकुलर विशेषज्ञ डा. राजीव गुप्ता ने मिलकर उनके पैर का आपरेशन कर दिया। 22 जून 2010 को जब राजकुमार उनके परिजनों को लगा कि उन्हें आराम नहीं मिला है तो वे डिस्चार्ज होकर सीधे अपोलो अस्पताल में जाकर भर्ती हो गए। वहां के डाक्टरों ने राजकुमार को बताया कि गलत तरह से किए गए आपरेशन के कारण उनके पैर में सेप्टिक (जहर) फैल गया है। अपोलो के डॉक्टरों ने राजकुमार की जांघ से नीचे तक दायां पैर काट दिया। चिकित्सकीय लापरवाही की बात अपोलो के डॉक्टरों ने लिखित रूप में दी थी। इसलिए उन्होंने 10 नवंबर 2010 को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम की शरण ली और 19 लाख रुपए का क्षतिपूर्ति मुआवजा का दावा डाला। अब फोरम की बेंच ने फैसला सुनाया है कि अस्पताल प्रबंधन, डा. राजीव गुप्ता और शैलेष जैन मिलकर शिकायतकर्ता को 9 लाख 14 हजार 227 रुपए क्षतिपूर्ति मुआवजा दें।

विवाद का निपटारा 120 दिन में करने के निर्देश

^उपभोक्तासंरक्षण एवं राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की तरफ से सभी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम को निर्देश हैं कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत आने वाली शिकायतों का निवारण 90 से 120 दिन में करने की कोशिश करें। -रविंद्र गुप्ता, को-आर्डिनेटर, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण एवं उपभोक्ता मामलों के वकील।

फैसले के खिलाफ अपील करूंगा: पीड़ित

^मेरेसाथ चिकित्सीय लापरवाही हुई। इससे मेरा दायां पैर जांघ से काटना पड़ा। मेरे दूसरे पैर को भी चिकित्सकों ने खराब कर दिया। आॅपरेशन के लिए दूसरे पैर से नस निकाली थी, जिस कारण दूसरे पैर से भी पूरी तरह खड़ा नहीं हो पाता हूं। इलाज पर खर्च, शारीरिक विकलांगता और बेरोजगारी के कारण गुजर बसर के लिए मैंने 19 लाख रुपए का दावा किया था। मुझे सिर्फ 9.14 लाख रुपए ही देने के आदेश दिए हैं। मुझे तो आधा ही न्याय मिला है। अब मैं अपीलेट फोरम में जाऊंगा। -राजकुमार, पीड़ित

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