समाज के तानों को ढाल बना बेटियों ने बढ़ाया देश का मान
शहरकी कई बेटियों ने अपनी मेहनत और कुब्बत के दम पर देश-दुनिया में अपनी एक पहचान बनाई है। इनकी शुरुआत आसान नहीं थी। शुरुआत में इन्होंने लोगों के ताने सुने। लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी। समाज के तानों को ढाल बनाकर अपने माता-पिता के प्यार से हर कठिनाई को पार करते हुए देश का मान बढ़ाया। आज शहर की इन बेटियों पर पूरे देश को गर्व हैं। ये बेटियां जवाब हैं उस समाज के लोगों के लिए जो महिलाओंं को पुरुष से कम आंकते हैं। इनके अभिभावक प्रेरणा स्त्रोत हैं उन मां-बाप के लिए जो बेटियों को पराया समझने वाली परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं। ये बेटियां हैं अंतर्राष्ट्रीय रेसलर नेहा राठी और शूटर अनीशा सैयद।
बचपन में देखे सपनों को जब पिता ने हौसला दिया तो फिर सफलता के ऐसे पंख लगे कि आज ये मुस्लिम समाज में खासकर लड़कियों के लिए रोल मॉडल हैं। सेक्टर-46 निवासी अंतर्राष्ट्रीय शूटर अनीसा सैयद की शुरुआत में प्रैक्टिस के लिए संसाधनों की कमी थी। 2010 में हुए कामनवेल्थ खेलों में गोल्ड मेडल पर निशाना लगाकर देश का नाम रोशन किया। 2014 में ग्लासगो में अायोजित कामनवेल्थ गेम्स में सिल्वर पदक जीतकर विदेशी सरजमीं पर तिरंगे का मान बढ़ाया।
हरकदम पति का िमला साथ
अनीशाकहती हैं उनके वालिद ने हमेशा उनका साथ दिया। उन्हें हर कदम पर सपोर्ट किया। उन्हें कभी यह एहसास नहीं होने दिया कि वे बेटी है और वह ऐसा नहीं कर सकती है। पति और उनके ससुर हसन मोहम्मद ने उनका पूरा साथ दिया। अनीशा ने कहा कि मेहनत के साथ घर वालों का सपोर्ट होना बहुत जरूरी है। उनके वालिद उनका साथ देते तो यह मुकाम पाना इतना आसान था।
स्प्रिंग फील्ड कालोनी निवासी अर्जुन अवार्ड से सम्मानित जगरूप सिंह राठी ने जब अपनी बेटी नेहा को रेसलर बनाने की ठानी तो समाज के काफी ताने सुनने को मिले। लोगों ने कहा कि क्यों अपनी बेटी को नरक में डाल रहे हो। पहलवानी इसके बस की बात नहीं है। लेकिन उन्होंने समाज के विरुद्ध जाकर अपनी बेटी को रेसलिंग की कोचिंग दी। इन्हीं तानों को सुनकर 27 वर्षीय नेहा ने अपनी ढाल बना खुद को इतना मजबूत बनाया कि आज वह बड़े-बड़े पहलवानों को धूल चटा देती हैं। नेशनल की 33 प्रतियोगिताओं में से 25 में नेहा राठी के नाम गोल्ड मेडल हैं। नेहरू कॉलेज से इंग्लिश में ग्रेजुएट हैं। इस समय वह हरियाणा पुलिस में डीएसपी हैं।
पिता ने साथ दिया तो मिली सफलता:नेहा
नेहा कहती हैं अगर उनका परिवार खासतौपर उनके पिता उन्हें सपोर्ट नहीं करते तो आज इस मुकाम तक पहुंचना नामुमकिन था। उन्होंने कभी बेटी होने के नाते मुझसे भेदभाव नहीं किया। हमेशा आगे बढ़ने की ही सीख दी है।