शोध कार्याें में गुणवत्ता लाए शोधकर्ता : दिनेश कुमार
फरीदाबाद| वाईएमसीएविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा शोधकर्ताओं के लिए शोधगंगा, साहित्यिक चोरी निरोधी साफ्टवेयर अनुसंधान आचरण को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञों शोधकर्ताओं ने साहित्यिक चोरी से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने किया। आए हुए विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर डीन फैकल्टी आफ इंजीनियरिंग प्रो. संदीप ग्रोवर डॉ. तिलक राज भी उपस्थित थे। कार्यशाला में इनफ्लिबनेट सेंटर, गांधीनगर के वैज्ञानिक मनोज कुमार जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के लाइब्रेरियन डा. रमेश सी गौड़ मुख्य वक्ता रहे। प्रो. दिनेश कुमार ने साहित्यिक चोरी पर अंकुश लगाने के लिए साहित्यिक चोरी निरोधी साफ्टवेयर की उपयोगिता शोध की गुणवत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा इस तरह की कार्यशालाएं छात्रों, शोधकर्ताओं और फैकल्टी सदस्यों के सही शैक्षणिक आचरण के लिए बेहद जरूरी है। कार्यशाला के मुख्य वक्ता मनोज कुमार ने शोधगंगा पर प्रकाश डाला शोधगंगा पर थीसिस प्रस्तुत करने, इसके प्रमाणीकरण, बेकअप आदि के यूनिविर्सटी समन्वयक भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। डा. गौड़ ने शोधगंगा की खूबियों साहित्यिक चोरी निरोधी साफ्टवेयर के उपयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने शोध लेखन संबंधी आचरण एवं मानदंडों के बारे में भी जानकारी दी। इस मौके पर साहित्यिक चोरी निरोधी साफ्टवेयर के उपयोग पर प्रस्तुतिकरण भी दिया गया। कार्यशाला का संयोजन डा. मनीषा गर्ग, डा. राजीव साहा और पीएन वाजपेयी ने किया। कार्यक्रम के अंत में यूनिवर्सिटी के आईक्यूएसी प्रकोष्ठ के निदेशक डा. हरि ओम ने सभी वक्ताओं का धन्यवाद किया।