भास्कर न्यूज|फरीदाबाद
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विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले का भ्रमण किया। इस मौके पर उनका अंदाज निराला था। तेलंगाना थीम स्टेट के शिल्पकार द्वारा दी गई फूलों की थाली को सिर पर रख लिया। वहीं अपणा घर हरियाणा में पगड़ी बंधवानी भी नहीं भूलीं। विदेशी शिल्पकारों के स्टॉल पर जाकर उनकी हौसला अफजाई की। उन्होंने कहा तेलंगाना के लोग उन्हें चिन्नमा कहकर पुकारते हैं। वे हरियाणा की बेटी हैं तो तेलंगाना की मौसी। इस प्रकार थीम स्टेट तेलंगाना से उनका खास नाता बन गया है।
दोनोंराज्यों में अनूठी समानता: उन्होंनेकहा हरियाणा अौर तेलंगाना में के बीच अनूठी समानता है। दोनों राज्यों की संस्कृति में ढोल का खास महत्व है। यहां भी ढोल का कार्यक्रम देखकर अच्छा लगा। उन्होंने कहा बंचारी का ढोल विख्यात है। इसके बिना हिंदुस्तान का कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न नहीं होता। उन्होंने कहा मेले में रिकॉर्ड 23 देश हिस्सा ले रहे हैं। इसमें चीन जापान फोकस देश हैं। उन्होंने रसिया के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों की प्रशंसा की।
रोमके साथ हैं खून का संबंध: उन्होंनेकहा पांचवीं सदी में भारत से गए लोग (गाड़ी लुहार) रोमवासी हैं। जिन्हें सिकंदर और गजनी हिंदुस्तान से ले गए थे। रोम के साथ भारतीयों का खून का संबंध है। उन्होंने कहा रूस से निकले देशों में भारतीय संस्कृति के प्रति विशेष भाव और प्रेम है।
मिस्रको कंट्री पार्टनर बनने का न्योता: विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने 2017 मेले का कंट्री पार्टनर बनने का न्योता मिस्र को दिया। आग्रह किया कि सूरजकुंड में मिस्र अपने स्टॉलों को पिरामिड के रूप में स्थापित करे।
साथ ही उन्होंने थीम स्टेट तेलंगाना के जन्म में अहम भूमिका निभाने की बात कही। उन्होंने कहा यहां उन्हें सुखद संगम मिला है। क्योंकि उनका स्वयं का जन्म हरियाणा में हुआ है।