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वार्डों की संख्या में उलझी वार्डबंदी नगर निगम चुनाव में होगी देरी

5 वर्ष पहले
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नगरनिगम की वार्डबंदी को लेकर अब एक और पेंच फंस गया है। अब तिगांव और फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र के वार्डों की संख्या को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। इससे वार्डबंदी को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। दोनों विधानसभा क्षेत्रों की जनसंख्या में काफी अंतर है लेकिन वार्ड समान बनाने को लेकर विवाद है। अब वार्डबंदी को लेकर 17 फरवरी को फिर से मीटिंग होगी। वार्डबंदी फाइनल होने से नगर निगम चुनाव लगातार खिंचते जा रहे हैं। चुनाव होने से 15 लाख लोगों की समस्याओं की पैरवी अफसरशाही की मनमर्जी का शिकार हो रही है।

वार्डोंको लेकर कहां अटका है पेंच

xवार्ड बनाए जाने की कवायद है। इसके अलावा फरीदाबाद शहरी विधानसभा क्षेत्र की जनसंख्या 2 लाxख 75 हजार है। इसमें भी 7 वार्ड बनाए जाने की कवायद है। इसे लेकर गतिरोध हो रहा है। जनसंख्या के आधार पर फरीदाबाद शहरी सीट के तहत 8 वार्ड बनने चािहए। बल्लभगढ़ विधानसभा क्षेत्र की जनसंख्या 2 लाख 74 हजार है और वहां 8 वार्ड हैं। अब फरीदाबाद शहरी सीट के विधायक विपुल गोयल अपने क्षेत्र में जनसंख्या के आधार पर 8 वार्ड बनाने की पैरवी कर रहे हैं।

नईकमेटी के चयन को हाईकोर्ट में चुनौती

निगमके पूर्व डिप्टी मेयर समेत अन्य ने वार्डबंदी की नई कमेटी को हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है। अभी यह मामला कोर्ट में लंबित है। इस मामले में 23 फरवरी की तारीख लगी है। इससे पहले नगर निगम चुनाव कराने के लिए 9 फरवरी 2015 को वार्डबंदी कमेटी का गठन किया गया था।

35 वार्डों की वार्डबंदी का काम पूरा हो गया था। लेकिन सरकार ने जून 2015 में नगर निगम सदन भंग होने के बाद बगैर कमेटी भंग किए नई एडहॉक कमेटी का गठन कर दिया था। याचिकाकर्ता निवर्तमान सीनियर डिप्टी मेयर एवं डिप्टी मेयर ने नई एडहॉक कमेटी को अवैध बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 13 अक्टूबर को हाईकोर्ट की एकल बेंच ने नई वार्डबंदी के लिए गठित एडहॉक कमेटी को भंग कर दिया था। उधर निगम ने नई अधिसूचना जारी कर निवर्तमान पार्षद राजेंद्र अग्रवाल, सतीश चंदीला, अजय बैसला, पूरन देवी एवं कुलदीप तेवतिया को नामित कर दिया।

^वार्डबंदी का फाइनल जल्द होना चािहए, क्योंकि जब तक यह काम नहीं हो जाता। तब तक नगर निगम चुनाव भी लटके रहेंगे। जनहित के मद्देनजर वार्डबंदी में किसी को राजनीतिक पेंच नहीं फंसाना चािहए। क्योंकि पार्षद होने से इस समय आम आदमी की शिकायतों को निगम अधिकारियों तक पहुंचाने के िलए कोई नहीं है। -सतीशचंदीला, पूर्व पार्षद एवं वार्डबंदी कमेटी मेंबर

^वार्डबंदी को लेकर कई मीटिंग हो चुकी हैं लेकिन सहमति नहीं बन पा रही है। अब 17 फरवरी को फिर से वार्डबंदी के प्रारूप पर चर्चा होगी। वार्डबंदी की कमेटी में शामिल पूर्व पार्षदों की राय भी ली जा रही है। इसके बाद ही इसे फाइनल किया जाएगा। -रविसिंगला, नोडल ऑफिसर, वार्डबंदी कमेटी नगर निगम।

^मेरी विधानसभा का एक भी वोटर दूसरी विधानसभा में नहीं जाना चाहिए। जनसंख्या के आधार पर वार्डों की संख्या निर्धारित होनी चाहिए। मैंने इस बारे में नगर निगम अधिकारियों को लिखित में लेटर दे दिया है। जनसंख्या के हिसाब से मेरे फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र में 8 वार्ड बनते हैं। -विपुलगोयल, विधायक, फरीदाबाद शहरी सीट।

सेक्टर-3 निवासी देवेंद्र, हर्ष कुमार, गोपीचंद के अनुसार वार्डबंदी का काम जल्द पूरा होना चाहिए। अब नगर निगम चुनाव लेट नहीं होने चाहिए। इससे आमजन के काम प्रभावित हो रहे हैं। वार्डों में कई समस्याएं ऐसी होती हैं जिन्हें पार्षद के माध्यम से हल करा लिया जाता है। वार्डबंदी फाइनल होने के बाद निगम चुनाव की तारीख की घोषणा हो जानी चाहिए।

वार्डबंदी कमेटी के सदस्य एवं पूर्व पार्षद अजय बैसला के अनुसार वार्डबंदी की मीटिंग में अक्सर अधिकारी जो नक्शा पेश करते हैं, वह अगली मीटिंग में बदल दिया जाता है। ऐसा जब अधिकारी करते हैं तो वार्डबंदी कमेटी के सदस्यों से नहीं पूछा जाता। इसलिए वार्डबंदी कमेटी का कोई मतलब नहीं रह जाता। इस मुद्दे को लेकर हमारी खूब गर्मागर्मी हुई है। ऐसा कतई नहीं होना चािहए। जो नक्शा मीटिंग में दिखाया जाता है। अगली मीटिंग में वही रहना चाहिए। हम सभी चाहते हैं कि वार्डबंदी को जल्द अंतिम रूप दे दिया जाए। इसके लिए दो विधानसभा क्षेत्रों की जनसंख्या वार्डों की संख्या को लेकर गहन मंथन हो रहा है। जल्द सब निपट जाएगा।

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