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आइए देखें मीना बाजार, इंडिया गेट और लोटस टेंपल

5 वर्ष पहले
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अरावलीकी गोद में बसे सुरजकुंड में कला और संस्कृति के महाकुंभ में कई तरह के हस्तशिल्प देखने को मिल रहे हैं। मेले में दिल्ली के पूरे मीना बाजार का दर्शन पर्यटकों को हो रहा है।

वहीं मोम से बनी एक लाख रुपए की साड़ियां हों या फिर पीतल पर बनाई गई कलाकृतियां। पर्यटकों को ये कलाकृतियां खूब लुभा रही हैं। अगर आप शिल्पकला और लकड़ी से बने सामानों के प्रेमी हैं तो आपकों स्टॉल-1002 पर मोहब्बत की मिसाल ताजमहल और देश की शान कहे जाने वाले इंडिया गेट तक सब मिलेगा। यही नहीं, दिल्ली शहर का मीना बाजार और लोटस टेंपल भी यहां आपको देखने के लिए मिलेगा।



मेलेमें पहली बार आई मोम से बनी साड़ी महिला पर्यटकों को खूब भा रही है। मेला परिसर के स्टॉल-661 पर महिला पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है। मोम की इन साडिय़ों पर बुटिक कर इस पर इंडोनेशियन चित्रकारी भी की गई है। जो महिलाओं को खूब पसंद रही है। स्टॉल के संचालक इंदौर निवासी यूसुफ कुरैशी बताते हैं कि इन साडिय़ों को बनाने में करीब 25-30 दिन का समय लगता है। उन्हेें मोम की साड़ी बनाने के लिए साल 2011 में मध्यप्रदेश सरकार ने स्टेट पुरस्कार से सम्मानित किया है। यहां आपको 350 रुपए से लेकर 1 लाख रुपए तक की मोम से बनी साड़ियां मिल जाएंगी।

मोम से बनाई साड़ी

सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला हाथ के तरह-तरह के हैरतअंगेज करिश्माई नमूनों से सजा हुआ है। पीतल को बड़े ही सलीके से ढाल-तराश कर नक्कासी करने के बाद कारीगर के कुशल हाथों से तैयार की गई शिल्पकारी समृद्ध भारतीय धरोहर के दर्शन करा रही है। कुछ ऐसा ही करिश्मा उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद से आए पीतल पर नक्काशी करने वाले शिल्पकार मोबिन हुसैन के स्टाल नम्बर-1009 पर देखा जा सकता है। इन्हें इस अद्भुत कला के लिए राष्ट्रपति द्वारा वर्ष 2010 के शिवगुरू अवार्ड से नवाजा जा चुका है। इनके स्टॉल पर रंगबिरंगी चित्रकारी से सजी पूजा की घंटियां, दीपक, फ्लावर पाट, मयूर हाथी जैसी अजीब तरह की नक्कासी मीनाकारी की कृतियां हैं। जो इस कला के जादूगर ब्रास शिल्पकार मोबिन हुसैन के कुशल हाथों के कमाल को बयां करती हैं। उनके तीन बेटे मोईन, नौशाद और नदीम को भी इस कला में पारंगत कर चुके हैं। वे सभी मिलकर काफी तादाद में ब्रास शिल्प की चीजें बनाते हैं। मुरादाबाद में डाक्टर ऑथर अली रोड स्थित अपने घर पर ही शिल्पकारी करते हैं।

पीतल के बर्तनों पर कलाकृतियां

स्टॉल-1002 दिल्ली के शिल्प गुरू अवार्डी पं. महेशचंद्र शर्मा का है। यहां आपको लकड़ी से बना वह सभी सामान मिलेगा, जिसकी आप इस अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में तमन्ना करते हंै। दिल्ली शहर का मीना बाजार, इंडिया गेट और दिल्ली का मशहूर लोटस टेंपल मिलेगा। यही नहीं, इस स्टॉल पर मोहब्बत की मिसाल कहे जाने वाला ताजमहल और अमृतसर का प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर भी पर्यटक को लुभा रहा है। यहां 5 हजार से लेकर 10 हजार रुपए तक की विभिन्न तरह की कलाकृतियां उपलब्ध हैं। शर्मा के अनुसार वह 7 साल की उम्र से कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं। यह काम उनके पुरखे भी करते थे। 70 वर्षीय शर्मा अपने इस खानदानी पेशे को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके बाद इस कला को बढ़ाने वाला उनके घर में कोई नहीं है। महेश बताते हैं कि सरकार मेले का आयोजन तो करती है। लेकिन शिल्पकारों को किसी भी प्रकार का कोई सहयोग नहीं देती है। उन्होंने कहा इस कला के लिए उन्हें साल 2007 में राष्ट्रीय शिल्प गुरू अवार्ड से नवाजा गया था।

लकड़ी की कलाकृति, मिला अवार्ड़

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