पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • विलुप्त होती शिल्प कलाओं का महाकुंभ बना सूरजकुुंड मेला

विलुप्त होती शिल्प कलाओं का महाकुंभ बना सूरजकुुंड मेला

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
फरीदाबाद। अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला विलुप्त होती शिल्प कलाओं का महाकुंभ बन गया है। दो साल पहले सूरजकुंड मेला प्राधिकरण ऐसी शिल्प कलाएं जो विलुप्त हो रही है उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए हेरिटेज सेंटर मेला परिसर में बनाने का निर्णय लिया था। इस बार 20 शिल्पकार अपनी कला का यहां प्रदर्शन कर रहे हैं।
चित्रकारी प्राकृतिक रंगों से: बकरे के चमड़े पर प्राकृतिक रंगों से चित्रकारी करके घरेलू सजावटी सामान बनाए जाते हैं। 2008 में हनुमंत को इसके लिए राष्ट्रीय अवार्ड भी मिल चुका है। उनकी स्टॉल पर 3 सौ से लेकर 50 हजार रुपए तक के सजावटी सामान उपलब्ध हैं। हनुमंत बताते है कि छोटे सामान को 3 व्यक्ति 3 दिन में तैयार करते हैं।
मुगलकालीन चित्रकला
मेले में आए हनुमंत चर्म चित्रकार हैं। मुगलकाल में चर्म चित्रकारी महलों की शोभा बढ़ाती थी। अब मेले में पर्यटकों को लुभा रही है। हुनमंत बताते है कि मौजूदा समय पिछले कई सालों से यह कला लोगों की उपेक्षा का शिकार होती जा रही है। मसलन यह कलाकृति अब अपने विलुप्त होने के कगार पर है। पर्यटक इस चित्रकारी के बारे में पूछते हैं। युवाओं में इसे लेकर उत्सुकता है। मेले में अलग से ऐसे हेरीटेज कलाकृतियों के लिए विशेष प्रयास किया जाए तो इसे फिर से लोकप्रिय बनाया जा सकता है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...
खबरें और भी हैं...