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सोशल ट्रेड कंपनी के गोलमाल में फरीदाबाद के भी 300 से अधिक लोग फंसे

5 वर्ष पहले
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फरीदाबाद. नोएडा की सोशल ट्रेड कंपनी के फेर में फरीदाबाद के भी 300 लोग फंसे हैं। इनमें से कुछ लोगों ने खेड़ी पुलिस चौकी में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। ठगी के इस खेल में फंसे स्थानीय लोगों को ई-मेल पर भेजी जाने वाली मेल को क्लिक करना होता था। हर क्लिक पर कंपनी के सदस्य के रूप में कार्य कर रहे यूजर्स को प्रतिमाह निर्धारित दर के हिसाब से रकम दी जाती थी। थाना भूपानी पुलिस ने इस मामले की जांच साइबर सेल को सौंपी है।

नोएडा के सेक्टर-63 में सोशलट्रेड.बिज नाम से एक सोशल ट्रेड कंपनी है। इस कंपनी ने देश भर में 7 लाख लोगों का एक समूह बनाया है। इन लोगों को ई-मेल भेजकर उन्हें क्लिक किए जाने की एवज में अच्छी खासी रकम दी जा रही थी। सोशल ट्रेड चेन सिस्टम के जरिए कंपनी ने बाजार से करीब 3700 करोड़ रुपए अर्जित कर लिए। कुछ बड़े बिजनेसमैन ने इसकी शिकायत नोएडा सेक्टर-14ए थाने में में की। नोएडा पुलिस ने जब मामले की तहकीकात की तो मामला ठगी का नजर आया। नोएडा पुलिस ने कंपनी के तीन लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है।
 
पांच एजेंसियां कर रही हैं मामले की जांच : साइबर सेल के इंचार्ज जयबीर सिंह के मुताबिक यह मामला पहले से ही नोएडा पुलिस ने दर्ज कर रखा है। दूसरी बात यह है कि जहां से अपराध का जन्म होता है, अपराध स्थल भी वही माना जाता है। इसलिए यह केस नोएडा पुलिस ने दर्ज किया है। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), विशेष जांच दल, आयकर विभाग, हैदराबाद पुलिस की साइबर क्राइम सेल और कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय की सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन टीम कर रही हैं। शिकायतों के लिए एसटीएफ ने जारी किया ई-मेल एड्रेस यूपी एसटीएफ की तरफ से सोशल ट्रेड कंपनी के फ्रॉड में फंसे लोगों के लिए एक ई-मेल आईडी भी सार्वजनिक की जा चुकी है। reportfraud@upstf.com पर फरीदाबाद के भी 40 से अधिक लोगों ने शिकायत मेल कर दी है।
 
कैसे होता था फ्रॉड 
मैनेजमेंट कॉलेज का संचालन करने वाले अनिल भड़ाना ने बताया कि कंपनी ने कुछ बड़ी कंपनियों को प्रमोट करने और उनका प्रचार-प्रसार करने की जिम्मेदारी ली हुई थी। सोशल ट्रेड कंपनी इस प्रचार-प्रसार की एवज में कंपनियों से लाखों रुपए महीने जुटा रही थी। कंपनी की तरफ से प्रचार-प्रसार के लिए चेन सिस्टम तैयार किया गया। कंप्यूटर यूजर्स को हथियार बनाया गया। उन्हें विज्ञापन देने वाली कंपनी द्वारा जारी ई-मेल या विज्ञापन स्लोगन को क्लिक करने की एवज में 5 रुपए प्रति क्लिक दिए जाने लगे। कंपनी इसकी एवज में पीछे अपने क्लाइंट कंपनियों से 10 रुपए प्रति क्लिक वसूल रही थी। एक ही यूजर्स विज्ञापन संबंधी ई-मेल पर सारा दिन बैठकर क्लिक करता था, जिन्हें कंपयूटर की भाषा में हिट्स कहा जाता है। हिट्स के हिसाब से सोशल ट्रेड कंपनी अपने बिजनेसमैन क्लाइंट से मोटी रकम वसूल रही थी। साथ ही यूजर्स को मेम्बर बनाने की आड़ में एक मुश्त सदस्यता शुल्क लेकर मोटा ब्याज वसूल रही थी।
 
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