बल्लभगढ़. मंझावली गांव के दो किसानों की बेटियां रितिका व आर्ची यादव तीरंदाजी में जिले का नाम रोशन कर रही है। दोनों ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गई हैं। पिता के मिल रहे सहयोग से पढ़ाई के साथ तीरंदाजी का प्रशिक्षण लेकर दोनों राष्ट्रीय स्कूल खेलकूद प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। दोनों ही अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रही हैं।
परिवार व स्कूल का रहा सपोर्ट
आर्ची व रितिका दोनों की तीरंदाजी के प्रति रुचि को देखते हुए उनके माता-पिता भी उनके आगे बढ़ने में पूरा सहयोग कर रहे हैं। 15 वर्षीय रितिका यादव के पिता सुरेंद्र यादव तथा आर्ची यादव के पिता राजेंद्र यादव दोनों ही गांव में खेती कर करते हैं। रितिका यादव विद्या सागर इंटरनेशनल स्कूल में 10वीं कक्षा की छात्रा हैं। आर्ची यादव भी इसी स्कूल में 9वीं क्लास की छात्रा है। स्कूल के डायरेक्टर दीपक यादव के अनुसार दोनों को एक साल पहले एकाएक तीरंदाजी खेल में प्रदर्शन करने की इच्छा हुई। दोनों ने इस बारे में स्कूल प्रबंधन से बात की। इसके लिए स्कूल के मैदान में तीरंदाजी के प्रशिक्षण की व्यवस्था कर दी गई। कोच नीरज वशिष्ठ को दोनों को प्रशिक्षण देने के लिए नियुक्त किया गया।
मेरी बेटी से मेरा नाम रोशन हुआ
रितिका यादव का कहना है कि उसके मन में तीरंदाज बनने की बचपन से ही इच्छा थी। एक बार उसने रामायण के सीरियल मेेंं भगवान राम व लक्ष्मण को तीर चलाते देखा तो मन में तभी से ठान लिया कि वह भी धनुर्धर बनेगी। पिता सुरेंद्र यादव को इस संबंध में बताया तो उसकी बात सुनकर पहले तो वह कुछ हिचकिचाए किंतु बेटी की रुचि को देखते हुए उन्होंने उसे उत्साहित करना शुरू कर दिया। रितिका कहती है कि तीरंदाजी प्रशिक्षण के चलते वह अपनी पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने देती। पिता सुरेंद्र यादव का कहना है कि बेटी रितिका ने तीरंदाजी में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर मेरा व गांव का नाम रोशन किया है।
बेटी मेरे लिए बेटे से बढ़कर
आर्ची यादव का कहना है कि उसे बचपन से ही तीरंदाजी का मन करता था। पिता राजेंद्र यादव को उन्होंने धनुष लाने के लिए कहा तो वह उसके लिए छोटा धनुष बाजार से ले आए। उसे देखकर वह बेहद खुश हुई। इसके बाद तीरंदाजी के प्रति उसकी रुचि बढ़ती गई। स्कूल के डायरेक्टर दीपक यादव को बताया तो उन्होंने तीरंदाजी के लिए व्यवस्था करा दी। छुट्टी के बाद वह स्कूल के मैदान में ही प्रशिक्षण लेती है। आर्ची यादव के पिता राजेंद्र यादव का कहना है कि मैं बेटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाने का प्रयास कर रहा हूं। मुझे खुशी है कि आर्ची भी कड़ी मेहनत कर रही है। मेरे लिए मेरी बेटी बेटे के समान ही हैं।
दोनों की उपलब्धियां
रितिका यादव पहली बार जनवरी 2015 में गुवाहटी में स्कूल नेशनल गेम के रिकर्व राउंड में खेली। रितिका ने अक्टूबर 2015 में फरीदाबाद में हुई प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। रितिका ने जमशेदपुर में भी स्कूल नेशनल खेलकूद प्रतियोगिता में उम्दा प्रदर्शन किया।
आर्ची ने 2014 में रतिया में हुई 33वीं राज्य स्तरीय कन्या प्रतियोगिता में भागीदारी की। इसमें आर्ची ने रजत पदक पर कब्जा जमाया। इसके बाद झारखंड में हुई स्कूल नेशनल खेलकूद प्रतियोगिता में रजत पर निशाना लगाया। अक्टूबर 2015 में फरीदाबाद में हुई प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में चौथा स्थान प्राप्त किया। हिसार में 24 से 26 अक्टूबर 2015 तक हुई ओपन स्टेट टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया।
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