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जब 16 सरकारी कर्मचारियों का मिला बीपीएल कार्ड तो चौंक गए सभी

8 वर्ष पहले
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फरीदाबाद. ग्रामीण क्षेत्र में फर्जी बीपीएल कार्डधारकों के साथ ही अब शहरी क्षेत्र में हुई जांच में भी चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। जांच टीम को 16 कार्डधारक ऐसे मिले जो सरकारी कर्मचारी हैं लेकिन गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन का कार्ड बनवा लिया है।

इन कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस टीम जांच कर रही है। इनमें सात कर्मचारी नगर निगम के हैं, जबकि सात टेलीफोन एक्सचेंज, एक खाद्य एवं आपूर्ति और एक कर्मचारी सरकारी बैंक में कार्यरत है। ऐसे लोगों की सूची तैयार करने के बाद जिला प्रशासन ने पुलिस को कार्रवाई करने को पत्र लिखा है। उधर, निगम कर्मचारियों के खिलाफ निगमायुक्त ने भी जांच शुरू करा दी है।

अब तक 30 से हुई रिकवरी : पूर्व में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में फर्जी तरीके से बीपीएल कार्डधारक बने 30 लोगों से जिला प्रशासन ने करीब तीन लाख रुपए की रिकवरी की है। इनमें ग्रामीण क्षेत्र के 22 लोगों से एक लाख 60 हजार रुपए की वसूली हो चुकी है। जबकि शहरी क्षेत्र में रहने वाले 8 लोगों से एक लाख 38 हजार रुपए की वसूली की जा चुकी है।

डीसी से जवाब तलब : प्रदेश के शहरी क्षेत्र के प्रधान सचिव और ग्रामीण क्षेत्र के प्रधान सचिव ने गुरुवार को जिला उपायुक्त बलराज सिंह से फर्जी बीपीएल कार्ड धारकों के मामले में जवाब तलब किया और इस मामले में जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यो की समीक्षा की।

36 के खिलाफ हुई थी केस दर्ज करने की सिफारिश : पिछले माह जिला प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्र में 36 लोगों के खिलाफ पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी। जांच के दौरान इन लोगों के पास ढाई एकड़ से ज्यादा जमीन मिली।

यही नहीं 11 लोग तो ऐसे हैं जो लोग सरकारी नौकरी में हैं।लेकिन इन्होंने बीपीएल कार्ड बनवा लिया।इनके खिलाफ पुलिस जांच चल रही है। यही नहीं अब तक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 3455 अपात्र बीपीएल कार्डधारकों को रिकवरी नोटिस जारी की गई है।इनमें 26 सौ से ज्यादा शहरी क्षेत्र के हैं और 845 ग्रामीण क्षेत्र के हैं।

3455 लोगों को जारी की गई रिकवरी नोटिस : जिला प्रशासन ने जिले के 3455 लोगों को फर्जी बीपीएल कार्ड मामले में रिकवरी नोटिस जारी किया है। इनमें से लगभग 2610 लोग शहरी क्षेत्र में रहने वाले हैं, जबकि 845 लोग ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित हैं।

बढ़ सकती है संख्या : जिले में 6688 लोगों का नाम बीपीएल कार्ड से हटाया गया है। इनमें से 5294 लोग शहरी और 1394 लोग ग्रामीण क्षेत्र से हैं। लेकिन जिला प्रशासन एक बार फिर इनकी जांच कर रहा है, ताकि किसी निदरेष व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज न हो। अधिकारियों की दलील है कि कुछ ऐसे भी व्यक्ति हैं, जिनका नाम बीपीएल सूची से तो हटा दिया गया है। लेकिन ये लोग बिल्कुल बीपीएल लाइन के करीब हैं।

बीपीएल में ये मिलती है सुविधा : बीपीएल कार्ड धारकों को सस्ता अनाज मिलता है। इसके अलावा ईडब्ल्यूएस प्लॉट आवंटित किए जाते हैं। रोजगारपरक लोन मुहैया कराने में इस श्रेणी के लोगों को विशेष तवज्जो दी जाती है। इंदिरा आवास योजना के तहत भी इन्हें सुविधाएं मिलती हैं।

इनके खिलाफ हो रही है जांच

जिला प्रशासन ने जिन 16 कर्मचारियों के खिलाफ जांच करने के लिए पुलिस को पत्र लिखा है। उनमें दस कर्मचारी राहुल कॉलोनी और छह कल्याणपुरी क्षेत्र में रहते हैं। इस मामले में डीसी ने पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। अब विजिलेंस टीम इन कर्मचारियों के पते पर जाकर उनके बारे में जानकारी एकत्र कर कार्रवाई करेगी।

फर्जी बीपीएल कार्ड धारकों की जांच के मामले में प्रधान सचिव को हमने जानकारी दी है। बताया है कि इस मामले में रिकवरी का काम जारी है। सरकारी नौकरी के बावजूद बीपीएल कार्ड बनवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को पत्र लिखा गया है।

-बलराज सिंह, डीसी

हम इस मामले में अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं, जांच कार्य पूरा होने पर हम विस्तृत जानकारी देंगे।

डॉ.अभय सिंह यादव, निगमायुक्त