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डाउनलोड करेंफरीदाबाद. जिला प्रशासन ने बीपीएल श्रेणी से 6688 लोगों के नाम हटा दिए हैं। इनमें से 3455 लोगों के खिलाफ फर्जी बीपीएल कार्ड के नाम पर सरकारी लाभ का दुरुपयोग करने के आरोप में रिकवरी नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं। हालांकि इस अभियान की चपेट में कई ऐसे गरीब परिवार भी आ गए हैं जिन्हें वास्तव में बीपीएल की दरकार है।
इन गरीब परिवारों ने बीपीएल के नाम पर सरकार से सहायता लेकर अपना रोजगार शुरू किया, लेकिन सूची से नाम कटते ही इन्हें सहायता राशि जमा करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। परिणामस्वरूप ये परिवार अब डीसी कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
क्या है मामला- बीपीएल के नाम पर सरकारी लाभ के दुरुपयोग की जांच में कई ऐसे परिवारों के नाम कट गए हैं जो वास्तव में गरीब हैं। इन लोगों ने बीपीएल के नाम पर सरकार से मिली सरकारी सुविधाएं और सब्सिडी के तौर पर मिली सहायता राशि से अपना जीवन यापन शुरू किया, लेकिन सूची से नाम कट जाने की वजह से आज इन परिवारों के सामने आगे कुआं-पीछे खाई जैसी स्थिति हो गई है।
बरती जा रही नरमी- हालांकि अधिकारी भी इस मामले में मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए वाजिब हकदारों के प्रति कुछ नरमी बरत रहे हैं। कई अधिकारियों ने दबी जुबान में अपने आला अधिकारियों को बताया है कि संबंधित व्यक्ति सहायता राशि वापस नहीं कर सकता है, उसकी माली हालत काफी खराब है।
इस बारे में एडीसी सुनीता वर्मा कहती हैं कि यह सही है कि कुछ ऐसे मामले प्रकाश में आ रहे हैं, लेकिन अब हम क्या कर सकते हैं। गौरतलब है कि शहर में लगभग 79 हजार बीपीएल धारक थे। सर्वे के बाद 6688 लोगों का नाम बीपीएल सूची से काट दिया गया। इनमें से 3455 लोगों को फर्जी बीपीएल कार्ड मामले में रिकवरी नोटिस जारी की गई है। इनमें से लगभग 26 सौ से ज्यादा लोग शहरी क्षेत्र में और 845 लोग ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित हैं।
प्रशासन ने लोगों को कई बार सूचित किया कि लोग अपना वेरिफिकेशन करा लें, बावजूद इसके कई लोगों ने अपना वेरिफिकेशन ठीक से नहीं कराया। यदि लोग ठीक से वेरिफिकेशन कराए होते तो उनका नाम बीपीएल सूची से नहीं कटा होता। अदालती आदेश से सर्वे किया गया था।
-बलराज सिंह, डीसी
केस नंबर-1
सेक्टर-56 के पास राजीव कॉलोनी में रहने वाले किताबुल ने सरकार से लगभग 45 हजार रुपए सहायता राशि लेकर अपना कारोबार शुरू किया। रोजगार के जरिए वह अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा है। लेकिन अब किताबुल का नाम बीपीएल सूची से कट गया है। उसकी बेटी का एम्स में इलाज चल रहा है। दूसरी ओर जिला प्रशासन ने रिकवरी के लिए किताबुल को नोटिस भेजा है। फिलहाल किताबुल ने किसी तरह चार हजार रुपए वापस कर दिए हैं।
केस नंबर-2
भीखम कॉलोनी निवासी प्रदीप कुमार ने बीपीएल कार्ड के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा से 50,000 रुपए सहायता राशि प्राप्त की। पैसा लेकर उसने ऑटो खरीदा और रोजगार शुरू किया। अब बीपीएल सूची से नाम कटते ही उसे लोन वापस करने के लिए नोटिस जारी कर दी गई। फिलहाल प्रदीप कुमार ने किसी तरह 7 हजार रुपए राशि की वापसी की है।
केस नंबर-3
बल्लभगढ़ क्षेत्र में रहने वाली एक विधवा को दस हजार रुपए सहायता राशि के तौर पर प्राप्त हुई, लेकिन बीपीएल सूची से नाम कटते ही उसके दरवाजे पर नोटिस आ गई कि सहायता राशि वापस करो। विधवा की दो जवान बेटियां हैं। ऐसे में यह महिला लघु सचिवालय में अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर लगा रही है। अधिकारी दलील दे रहे हैं कि इस मामले में वे कुछ नहीं कर सकते हैं। यदि कोई रियायत दे सकता है तो वो हैं डीसी साहब।
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