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फरीदाबाद. ट्रिब्यूनल कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए पुत्रवधू को ससुर का घर छोड़ने के लिए 45 दिन का समय दिया है। ससुर ने अपने पुत्र को घर से बेदखल कर दिया था। बहू और बेटा दुबई में रहते थे। बेटे के साथ बहू का विवाद हुआ तो वह यहां ससुर के घर चली आई। लेकिन ससुर उसे रखना नहीं चाहते थे। सुनवाई के दौरान ससुराल पक्ष ने बहू के रहन-सहन का खर्च उठाने की भी हामी भर दी। विशेष सुनवाई में करीब तीन घंटे जिरह हुई।
गौरतलब है कि सेक्टर-15 निवासी एचपी सिंह ने ट्रिब्यूनल को शिकायत दी थी कि उनकी पुत्रवधू उनके घर में घुस आई। उसे घर से निकला जाए। उनकी दलील थी कि उन्होंने अपने पुत्र नवनीत को बेदखल कर रखा है। नवनीत लंबे समय से दुबई में अपनी पत्नी के साथ रह रहा है। दोनों में झगड़ा हुआ तो बहू घर लौट आई और एचपी सिंह के घर में रहने लगी। जबकि बहू का कहना था कि नवनीत ने उसके साथ र्दुव्यवहार किया। अब ससुर के घर में नहीं रहूंगी तो कहां जाऊंगी।
उनका यह भी कहना था कि वे पति के साथ रहना चाहती हैं, लेकिन जरूरी है कि उनमें सुधार लाया जाए। दूसरी ओर शिकायतकर्ता एचपी सिंह का कहना था कि बहू का उनके घर में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा बहू के आने से घर में तनाव बढ़ गया है। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में महिला के बिखरते घर को बचाने के लिए विशेष प्रयास किए।
नवनीत को ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश होने को कहा। लेकिन नवनीत पेश नहीं हुआ। कई बार की सुनवाई के बाद भी मामले का कोई हल नहीं निकलने पर ट्रिब्यूनल ने विशेष तौर पर इस मामले की सुनवाई की। फैसला दिया कि बहू 45 दिन में ससुराल पक्ष का घर खाली कर देंगी। ट्रिब्यूनल के आग्रह पर ससुराल पक्ष बहू के घर छोड़ने पर उसके रहने के लिए मकान का किराया व पौत्र का खर्च वहन करने के लिए आगे आया।
कोर्ट के आदेश पर ससुराल पक्ष ने जताई सहमति
ससुराल पक्ष ने कहा कि वे प्रतिमाह बहू को 16 हजार रुपए देंगे। ट्रिब्यूनल ने बहू के पिता को भी अनुमति दी कि वे पुत्री से मिलने के लिए एचपी सिंह के आवास पर जा सकते हैं। इसके पहले ससुराल पक्ष ने इस पर रोक लगा रखी थी। ट्रिब्यूनल की जांच अधिकारी एवं जिला समाज कल्याण अधिकारी सुशीला देवी भी मौजूद थीं।
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