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इनके लिए बातें हैं, बातों का क्या...देखें हरियाणा चुनाव से जुड़े 12 रोचक कार्टून

7 वर्ष पहले
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भिवानी. वर्ष 2000 की बात है। ओमप्रकाश चौटाला ने बिजली बिल माफी को लेकर सत्ता हासिल की। प्रदेश में विशेषकर दक्षिण हरियाणा में बिजली बिलों व स्लैब प्रणाली को लेकर लगभग तीन दशक से राजनीति गर्माई हुई है।

स्लैब प्रणाली उस समय सुर्खियों में आई, जब 1998 में मंढियाली कांड हुआ। भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने स्लैब प्रणाली लागू करने की मांग उठाई हुई थी। उस समय बंसीलाल मुख्यमंत्री थे। लोगों ने धरना प्रदर्शन शुरू किया हुआ था। उस समय आंदोलन में पुलिस के साथ झड़प में पांच लोगों की मृत्यु हो गई थी। यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैल गया।

प्रदेश में ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व में नई सरकार ने शपथ ली। दूसरी तरफ चुनाव नजदीक आ रहे थे। वर्ष 2000 में चुनाव तय थे। चुनावी सभाओं में आेमप्रकाश चौटाला का मुख्य नारा था, "न मीटर रहेगा और न मीटर रीडर' यानि सरकार बनने पर बिजली बिल नहीं होंगे। प्रदेश के लोगों को मुफ्त में बिजली दी जाएगी। इस वादे के कारण वर्ष 2000 के चुनाव में इनेलो को अच्छी बढ़ती मिली और सरकार बना ली। लेकिन वादा पूरा न हुआ तो दोबारा सरकार नहीं बनी।
नाराजगी इतनी बढ़ी कि बाहर हो गए
बिजली बिल माफ और मुफ्त बिजली का वादा चौटाला पूरा नहीं कर सके। इस कारण वर्ष 2005 के चुनाव में कांग्रेस को 67 सीटें प्राप्त हुई थी। उस समय कांग्रेस को 42 प्रतिशत से अधिक मत मिले थे। 67 सीट मिलने का कारण भी चौटाला की वादाखिलाफी रही। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मुख्यमंत्री बनने के बाद 1600 करोड़ के बिजली बिल माफ किए थे। इसी का प्रचार कर भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने दूसरी बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाई थी। हालांकि अब बिजली को लेकर ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी घिरे हुए हैं।
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