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मेले में कलाकारों ने जमाया रंग, झूमे दर्शक, रूस की वेशभूषा शैली अदभुत है : सीएम

6 वर्ष पहले
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फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में सोमवार को आए नए डांस ग्रुपों ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया। कार्यक्रम शुरू होते ही मेले की चौपाल खचाखच भर गई। कलाकारों की प्रस्तुति पर दर्शक भी जमकर झूमे। यही नहीं मेला आने वाले दर्शकों को इस हफ्ते चौपाल पर और नए कलाकारों का संगम देखने को मिलेगा। उनकी संस्कृति से भी सैलानी रूबरू होंगे। मेले की चौपाल पर सोमवार को 16 ग्रुपों ने प्रस्तुति दी। इसमें विदेशी ग्रुप में श्रीलंका, अरमेनिया, रशिया, उज्बेकिस्तान, बेलारूस आदि ने प्रस्तुति दी। इसके अलावा छत्तीसगढ़, गुजरात, जम्मू, हरियाणा, पंजाब, लक्ष्यदीप व तेलंगाना के कलाकारों ने भी कोई कमी नहीं होने दी। जबकि नए ग्रुप डांसरों में असम, लद्दाख, मेघालय और ओडिशा की प्रस्तुति ने समां बांध दिया।

क्यों बदले ग्रुप: अधिकारियों का कहना है कि हर सप्ताह लोगों को एक नई ताजगी का अहसास इस अंतरराष्ट्रीय मेले में कराया जा सके। इसके तहत ही ग्रुपों के एक पीरियड के हिसाब से कांट्रेक्ट किए गए हैं। इसमें पिछले सप्ताह कार्यक्रम पेश करने वाले कई ग्रुप लौट गए हैं। तो कुछ नए आ चुके हैं। और कुछ नए आने वाले हैं। लोगों को विभिन्न संस्कृति से जुड़े डांस के बारे में जानकारी हो सके। इसलिए कार्यक्रम बदल-बदल कर हो रहे हैं।

ये आए नए ग्रुप: छत्तीसगढ़ में गोवर्धन पूजा व दीपावली के अवसर पर एक महीने तक चलने वाला राउतनाचा नृत्य वहां के 20 कलाकारों ने यहां पेश किया। यह एक प्रकार का बधाई नृत्य है। लेकिन यह इन दो पर्व पर प्रमुखता से किया जाता है। डंडे पर झालर लगाकर इस नृत्य को पेश किया जाता है। वर्षों से यह नृत्य इन त्यौहारों पर छत्तीसगढ़ में किया जाता है।

ओडिशा का गौरी पोआ: ओडिशा के वीरनरसिंगपुर से आए बाल कलाकारों का ग्रुप यह नृत्य प्रस्तुत कर रहा है। यह नृत्य छोटे-छोटे बच्चे करते हैं। कहते हैं कि लॉर्ड जगन्नाथ जब सोने से पहले जाते थे तो बच्चों द्वारा पेश किए गए इस नृत्य को देखकर ही सोते थे। तभी से यह नृत्य ओडिशा में किया जा रहा है। यह काफी कुछ क्लासिक नृत्य की प्रस्तुति से मेल खाता है।

लद्दाख का जबरो, असम का बीहू : इन दोनों डांस की अलग संस्कृति है। पेश करने का ढंग भी अलग है। लेकिन इसमें एक समानता यह है कि दोनों डांस नववर्ष पर किए जाते हैं। जब फसल पकती है और कट जाती है तो इन दोनों जगह उसी समय नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। उसी की खुशी को जताने के लिए किसान यह नृत्य करते हैं।

मेघालय का वारियर्स डांस: इस डांस को खासी जनजाति के लोग राजा महाराजाओं के समय से करते आ रहे हैं। जब भी कबीले या राजा-महाराजा कहीं से जंग जीतकर आते तो उसकी खुशी मनाने के लिए इस डांस का आयोजन किया जाता था।

अरमेनिया का संतूर ट्रेडिशनल म्यूजिक: अरमेनिया से आए ग्रुप की अपने संतूर ट्रेडिशनल म्यूजिक की प्रस्तुति ने लोगों को अलग सुकून दिया। लोग उस म्यूजिक की प्रस्तुति में खो गए। ग्रुप के 8 कलाकारों ने इसे पेश किया। कलाकारों का कहना है कि इसमें भारतीय म्यूजिक की छवि काफी हद तक मिलती है। ये वाद्य यहां भी प्रस्तुत किए जाते हैं।
परिसर में गूंजे बंचारी के नगाड़े
मेला परिसर में बंचारी के नगाड़ों की थाप ने माहौल को खुशनुमा बना दिया। बीन पार्टी भी पीछे नहीं रही। मेले परिसर में नगाड़ों की थाप ऐसी होती है कि हर कोई थिरकने के लिए मजबूर हो जाता है।
रूस की वेशभूषा और नृत्य शैली अदभुत है : सीएम
सीएम मनोहर लाल ने खट्टर ने कहा कि रूस की वेशभूषा और नृत्य शैली अदभुत है। इसकी जितनी सराहना की जाए उतनी कम है। सूरजकुंड में सोमवार को आयोजित विधायकों की बैठक के बाद लंच के दौरान रूस के कलाकारों की ओर से प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की सीएम ने खूब सराहना की। इस दौरान रूस के कलाकारों ने गरमोन और परंपरागत नृत्यों को प्रस्तुत किया। रूस के कजान सिटी से आए कलाकारों ने भी बेहतरीन प्रस्तुति दी। इसके बाद किर्गिस्तान के पामोश वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति दी गई। जो बहुत ही दिलकश और नायाब थी। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में रिपब्लिकन आफ बेलारूस की विभिन्न प्रस्तुतियों को प्रदर्शित किया गया। इन कलाकारों ने इंडियन डांस की भी प्रस्तुति दी। रूस के कलाकारों ने रामायण को कठपुतली के माध्यम से रूसी भाषा में प्रस्तुत किया। जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस दौरान कलाकारों ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया। इस दौरान सीएम ने कलाकारों के साथ फोटो भी खिंचाई। इस मौके पर हरियाणा भाजपा के प्रभारी श्री अनिल जैन, केन्द्रीय सामाजिक एवं अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर, हरियाणा के पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा, हरियाणा के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, सामाजिक एवं अधिकारिता मंत्री कविता जैन, लोक निर्माण मंत्री नरवीर सिंह, हरियाणा के पर्यटन राज्यमंत्री कर्णदेव कंबोज, सामाजिक एवं अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्ण बेदी, विधायक सीमा ित्रखा, विधायक मूलचंद शर्मा, जिलाध्यक्ष अजय गौड़, भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष नयनपाल रावत, तिगांव के वरिष्ठ नेता राजेश नागर सहित अन्य नेता मौजूद थे।
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