फरीदाबाद। कांग्रेस को प्रदेश में उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के वरिष्ठ वयोवृद्ध नेता एवं प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री एसी चौधरी ने पार्टी को अलविदा कह दिया। पूर्व मंत्री एसी चौधरी बडख़ल विधानसभा क्षेत्र से टिकट न मिलने से नाराज चल रहे थे। इससे गुरुवार को उन्होंने कांग्रेस को टाटा कह दिया। हालांकि आज पूर्व मंत्री एसी चौधरी ताऊ देवीलाल की जयंती पर जींद में आयोजित रैली में शामिल हुए लेकिन उन्होंने इनेलो में शामिल होने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा वह किस पार्टी में शामिल होंगे तथा कौन से प्रत्याशी की मदद करेंगे। इसका फैसला वह एक-दो दिनों में समर्थकों से राय-मशविरा करने के बाद सार्वजनिक करेंगे। यहां ध्यान रहे कि कांग्रेस उन्हें एनआईटी विधानसभा क्षेत्र से टिकट देने की बात कह रही थी। लेकिन वे इस पर राजी नहीं हुए। क्योंकि 2009 का चुनाव उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर एनआईटी से लड़ा था और निर्दलीय कैंडीडेट पंडित शिवचरण लाल शर्मा से चुनाव हार गए थे। इसलिए वे एनआईटी से चुनाव लडऩा नहीं चाहते थे। वे बडख़ल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर अंत तक अड़े रहे क्योंकि यह क्षेत्र पंजाबी बहुल है। साथ ही यहां चौधरी की पकड़ भी अच्छी है। लेकिन बुधवार को जब कांग्रेस की लिस्ट जारी हुई तो बडख़ल से विधायक और हरियाणा सरकार के केबिनेट मंत्री चौ. महेंद्र प्रताप सिंह को टिकट दी गई।
चौधरी का सफर
एसी चौधरी ने 1977 में कांग्रेस के टिकट पर पहला चुनाव लड़ा था। 1982, 1991 और 2005 में भी चुनाव जीता। जबकि 1987, 1996, 2000 और 2009 में चुनाव हारे। चौधरी 1982, 1991 और 2007 में राज्य मंत्रीमंडल में कैबिनेट स्तर के मंत्री भी रहे। 72 वर्षीय चौधरी का कहना है कि वे अब पंजाबी समाज के लिए काम करेंगे।
क्या पड़ेगा असर
एसी चौधरी के पार्टी छोडऩे से कांग्रेस और भाजपा दोनों को नुकसान पहुंचेगा। क्योंकि एसी चौधरी कांग्रेस के मजबूत सिपाही थे और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे। जबसे उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा है आज तक उन्होंने दल-बदल नहीं किया। कई ऐसे मौके आए जब उन्होंने नाराजगी तो कई मुद्दों को लेकर जताई लेकिन कभी पार्टी नहीं छोड़ी। चौधरी से बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता और पंजाबी समुदाय के लोग जुड़े हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस छोडऩे से ये लोग भी एसी चौधरी के साथ इनेलो के साथ जुड़ सकते हैं। इसके अलावा भाजपा पर भी इसका असर पड़ सकता है। क्योंकि चौधरी के साथ जो पंजाबी जुड़े हुए हैं उनका झुकाव बडख़ल विधानसक्षा क्षेत्र से पंजाबी और इनेलो कैंडीडेट चंदर भाटिया के साथ हो सकता है। ऐसे में एसी चौधरी के पार्टी छोडऩे से जहां कांग्रेस और भाजपा को नुकसान पहुंच सकता है वहीं इनेलो को फायदा मिलने के आसार बन गए हैं।