बल्लभगढ़। उपमंडल में कई दिन से चल रही खाद की किल्लत को लेकर किसान भारी परेशान हैं। किसान आए दिन मंडी में खाद के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों को खाद के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में खाद की आपूर्ति किए जाने का आश्वासन दिया जा रहा है लेकिन किसान दुकानदारों से ब्लैक में खाद लेने को मजबूर हैं।
बिजाई का सीजन और समय पर खाद नहीं मिलने से किसान सुबह से ही सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने में जुट जाते हैं। लेकिन कार्यालयों में न अधिकारी मिल रहे और न गोदामों में खाद उपलब्ध है। ऐसे में किसानों को औने-पौने दामों पर बाहर से खाद खरीदनी पड़ रही है। अधिकारियों ने भी किसानों को खाद लेने के लिए नए नए मापदंड लागू कर दिए हैं। किसान धर्मवीर, जोगेंद्र व सतवीर ने बताया कि वह कई दिन से खाद के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। फिर भी खाद नहीं मिल रही है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. महावीर सिंह का कहना है कि यूरिया ज्यादातर सहकारी समितियों के माध्यम से वितरित की जा रही है। सहकारी समितियों में परमिट से खाद दी जा रही है। फरीदाबाद में अब तक जितनी खाद आई है उतनी किसानों को पूरी तरह से वितरित की जा चुकी है।
ठंड बढ़ने से किसानों के चेहरे खिले
शनिवार को उपमंडल में हुई हल्की बूंदाबांदी से ठंड एकाएक बढ़ गई है। ठंड के बढ़ने से किसानों ने राहत की सांस ली है। दिसंबर आधा बीतने के बाद भी ठंड शुरू नहीं हुई थी। इससे गेहूं, जौ, सरसों आदि फसलों की पैदावार में गिरावट आने की आशंका थी। परंतु अब यदि ठंड इसी प्रकार बनी रही तो फसलों में फुटाव अच्छा होगा। जिससे पैदावार में गिरावट नहीं होगी।
सरकार पर्याप्त यूरिया उपलब्ध कराए
कृषि विभाग के मुताबिक दिसंबर में फसलों में फुटाव के लिए आर्द्रता और अधिकतम 18 डिग्री तापमान से कम की जरूरत पड़ती है। इस बार मानसून कमजोर रहने से मिट्टी में नमी की कमी थी और ठंड कम पड़ने से बची हुई नमी भी खत्म हो रही थी। इससे फसलों की बढ़वार और फुटाव पर असर पड़ रहा था। जिससे किसान चिंतित थे। किसान महेंद्र व बिजिन्द्र का कहना है कि ठंड बढ़ने के साथ-साथ फसलों के लिए ज्यादा यूरिया की जरूरत होगी। ऐसे में यूरिया की मांग बढ़नी तय है। लेकिन स्थिति यह है कि अभी से ही किसानों को यूरिया की किल्लत झेलनी पड़ रही है। सरकार को पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराना चाहिए। जिससे फसल पैदावार पर असर न पड़े।