फरीदाबाद।अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में मंगलवार को गीत-संगीत और डांस पर स्टूडेंट्स ने जमकर मस्ती की। देसी और विदेशी कलाकारों के साथ युवा जमकर थिरके। मेले की चौपाल पर दर्शकों को एक अलग संस्कृति का संगम देखने को मिल रहा है। मंगलवार को देसी-विदेशी कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। जिसे देख दर्शक वाह-वाह कर उठे। मंगलवार को देश-विदेश से आए 17 ग्रुप डांसरों ने मेला चौपाल पर दर्शकों का मनोरंजन किया।
इसमें विदेशी ग्रुप में जार्जिया, श्रीलंका, अजरबेजान, किर्गिस्तान और बेलारूस के कलाकारों ने अपने नृत्य से समां बांध दिया। देश के छत्तीसगढ़, असम, मेघालय, लद्दाख, उड़ीसा, अरुणाचल की प्रस्तुति देखने लायक रही। इन कलाकारों की प्रस्तुति पर लोगों ने जमकर तालियां बजाईं। भारी भीड़ इन कार्यक्रमों को देखने के लिए चौपाल पर जमा थी।
मेघालय के डांस की धूम
मेघालय से आए खासी समुदाय के लोगों ने इस डांस को पेश किया। इसमें 12 कलाकार थे। यह प्रस्तुति देखने लायक थी। वाद्ययंत्र कषाद, सिसोद्रम पर यह नृत्य कलाकार करते हैं। जब काम कर वह वापस लौटते हैं तो जश्न के तौर पर इस नृत्य का आनंद लिया जाता है।
अरुणाचल का ब्रोजई डांस
अरुणाचल के ब्रोजई डांस को वहां के लोग चिंदांग फेस्टिवल के मौके पर करते हैं। यह डांस वहां पर लोगों को एकत्र करने और खुशी बांटने के लिए किया जाता है। 15 लोगों ने इस डांस को प्रस्तुत किया। कोऑर्डिनेटर अजय सिदासु के अनुसार अक्टूबर माह में होने वाली मक्का और फिर गेहूं की फसल कटने पर वहां के गांवों में होने वाले फेस्टिवल पर यह लोक नृत्य वर्षों से किया जाता है। जिस ड्रेस को पहनकर यह डांस किया जाता है उसे ग्रीजा ड्रेस कहते हैं। इस मौके के लिए इस ड्रेस को विशेष तौर पर बनवाया जाता है।
बेलारूस के पावा और क्राजिऑल नृत्य
बेलारूस से आए 12 कलाकारों ने इन दो नृत्यों को चौपाल पर पेश कर समां बांध दिया। पावा डांस एक तरह से बर्ड डांस है। इसमें मोर के डांस की विभिन्न शैलियों को इस डांस द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। इन डांस में कलाकार अपने यहां के ट्रेडिशनल डांस का भी पुट डालते हैं। 1 मेल और 6 फीमेल डांसर इसे यहां मेले में प्रस्तुत कर रहे हैं। इस बर्ड डांस के समाप्त होते ही क्राजिऑल की प्रस्तुति मिक्स हो जाती है। जिसमें झूले के विभिन्न रूपों को डांस के माध्यम से दिखाया गया है। ये दोनों मेले की सबसे
खूबसूरत प्रस्तुति अभी तक की रही है। इन पर दर्शकों ने जमकर ताली बजाई।
जार्जिया का म्यूजिक
जार्जिया के रूसतवी ग्रुप अपने वहां का ट्रेडिशनल म्यूजिक पहली बार प्रस्तुत करने के लिए भारत पहुंचा है। अभी तक यह ग्रुप इसकी प्रस्तुति 70 देशों में कर चुका है। इस ग्रुप ने इमरोली और हरीराम दो म्यूजिक प्रस्तुति से दर्शकों को मुग्ध कर दिया। इमरोली एक वर्किंग सांग है। जिसे जार्जिया में काम करते वक्त लोग एक साथ मिलकर गाते रहते हैं। जबकि हरीराम पार्टी मस्ती सांग है। पार्टियों में अक्सर इस सांग पर लोग जमकर ठुमके लगाते हैं।
ये भी रहे पसंदीदा
इसके अलावा असम का बीहू, उड़ीसा का गोटी पोआ, अजरबेजान का नक्शवानी डांस, श्रीलंका का पूजा डांस और वालिका पटुला डांस भी आकर्षण का केंद्र रहे। किर्गिस्तान के नृत्य भी काफी पंसद किए गए। मेला परिसर में बंचारी के नगाड़े और बीन पार्टी ने दर्शकों को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इन नृत्यों पर युवा जमकर थिरक रहे हैं। मेले में इस समय छात्र बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
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