फरीदाबाद। हरियाणा की नई खेल नीति में इस बार कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसमें सबसे बड़ा बदलाव नौकरी पाने वाले खिलाडिय़ों के प्रदर्शन को लेकर किया जा रहा है। उनके प्रदर्शन पर पैनी नजर इस खेल नीति के तहत रहेगी। सूत्रों से मिली जानकारी के हिसाब से अब खेल से नौकरी प्राप्त करने वाले खिलाड़ी की नौकरी उसके प्रदर्शन पर टिकी रहेगी। अगर उसके प्रदर्शन में गिरावट आई तो उसका डिमोट भी किया जा सकता है। यहां तक कि नौकरी से भी उसको हाथ धोना पड़ सकता है।
क्यों किया गया प्रावधान
पिछली सरकार की खेलनीति खिलाड़ी द्वारा मेडल लाने और पुरस्कार देने तक ही सीमित रही। जिन खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई। उन्हें बाद में सरकार ने पलट कर उनका प्रदर्शन नहीं देखा। बस जो भी मेडल लाता। उसे पुरस्कार के तहत नगद इनाम दे दिया जाता। उनके खेल में गिरावट होती चली गई। सूत्रों के अनुसार हरियाणा राज्य सरकार के सर्वे के अनुसार ही 80 फीसदी खिलाड़ी नौकरी प्राप्त करने के बाद खेल को किनारा कर गए। उनका खेल में किसी भी प्रकार का कोई योगदान नहीं देखा गया। मात्र एक प्रतिशत ही खेल में भागीदारी राज्य की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में होने लगी। अब जबकि कई जिलों में विभिन्न खेलों में रुझान बढ़ रहा है। प्रतिभाएं बड़ी संख्या में निकलकर सामने आ रही है। वे आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत सके। इसके लिए बेहतरीन खिलाड़ी योगदान दें। स्वयं भी मेडल जीते और दूसरों को भी प्रशिक्षित करें। इसके तहत ही खेलनीति में यह बदलाव किया गया है।
12 जनवरी को हाेगी लागू
नीति को बनाने के लिए कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न खेलों से संबंध रखने वाले प्रतिष्ठित खिलाड़ी एवं खेल विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। जाेकि खेलों में रुचि रखने वाले खिलाड़ियों, अन्य जानकारों से भी सुझाव ले रहे हैं। ताकि खिलाड़ियों के अनुकूल ये नीति रहे। मिली जानकारी के अनुसार इस खेल नीति की घोषणा 12 जनवरी 2015 स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर की जाएगी।
यूथ है प्राथमिकता: कमेटी सूत्रों के अनुसार इस प्रावधान के अलावा नई नीति की प्राथमिकता यूथ है। युवा खिलाड़ियों को आगे लाने पर विशेष बल इसके तहत दिया जाएगा। खेल के नए तरीकों, उचित खानपान, अन्य सभी मूलभूत सुविधाएं शहर, गांव व हर कस्बे में मौजूद हो। इन पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। हर जाति वर्ग को प्राथमिकता रहेगी।
'नई खेल नीति में युवा खिलाड़ियों को आगे लाने के तहत प्रयास है। वहीं पुराने खिलाड़ी भी योगदान दें। इसके तहत ही ये प्रावधान किया जा रहा है। सही भी है। अगर आपका खेल में योगदान समाप्त हो गया है। तो फिर नौकरी के भी हकदार आप नहीं हैं। दूसरों को मौका दिया जाना चाहिए। ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन खिलाड़ियों की फौज तैयार हो। हरियाणा के गिने-चुने खिलाड़ी ही हमेशा मेडल लाते रहे हैं। नई खेलनीति प्रतिभाओं को आगे लाएगी। गिने-चुने खिलाड़ी प्रदेश में नहीं रहेंगे।' -अनिल विज, खेल मंत्री