फोटो- सेक्टर-15 स्थित श्रद्धा रामलीला कमेटी के मंच पर रामलीला का मंचन करते कलाकार।
फरीदाबाद। ऐसे भक्त कहां-कहां ऐसे भगवान, कांधे पर दो वीर बिठाकर चले वीर हनुमान…हनुमान अपने प्रभु राम से मिलते हैं। इस दृश्य को रामलीला में बेहद संजीदगी से दिखाया गया। सीता की खोज में जब राम-लक्ष्मण वन में भटकते हैं, तो उनकी मुलाकात हनुमान से होती है। हनुमान साधु का वेष धारण कर उनसे उनके संबंध में जानकारी प्राप्त करते हैं। जैसे ही उन्हें पता चलता है कि ये उनके प्रभु राम हैं तो वे राम के चरणों में नतमस्तक हो जाते हैं। उन्हें व लक्ष्मण को अपने कंधों पर बिठाकर महाराजा सुग्रीव के पास ले जाते हैं। शहर में चल रही रामलीला में अलग-अलग दृश्यों का मंचन हुआ। कही बालि वध हुआ, तो कहीं कटी शूर्पणखा की नाक, कहीं हनुमत ने रावण की वाटिका तहस-नहस कर दी।
शबरी के खाए झूठे बेर, किया बालि वध
एनएच-1 की विजय रामलीला कमेटी की रामलीला में सीता की खोज करते-करते राम-लक्ष्मण शबरी के आश्रम पहुंचते हैं। जहां शबरी वर्षों से प्रभु राम के आने का इंतजार करती है। इस दृश्य को कमेटी के चेयरमैन विश्वबंधु शर्मा ने अपनी आवाज देकर सुंदर रूप दिया है। अपने प्रभु राम के आते ही शबरी उनके चरणों में गिर जाती है। प्रभु राम के मुख में कोई कड़वा या खट्टा बेर न जाए इसलिए शबरी पहले खुद बेर चखकर अपने भगवान को खिलाती है। दूसरे दृश्य में राम व हनुमान का मिलन दिखाया गया। इसे देख दर्शक भावुक हो गए। राम-लक्ष्मण सुग्रीव से मिलते हैं। सुग्रीव उन्हें अपने भाई बालि की कथा सुनाते हैं। राम सुग्रीव को वचन देते हैं कि वे स्वयं बालि का वध करेंगे। इसके बाद सुग्रीव बालि को युद्ध के लिए ललकारते हैं। दोनों के बीच भीषण युद्ध होता है। भगवान राम के तीर से बालि का वध होता है। अगले दृश्य में हनुमान को वानर सेना उनकी भूली शक्ति के बारे में याद दिलाते हैं। इसके बाद वे सीता के खोज में निकल पड़ते हैं। इसमें हनुमान की भूमिका सुनील कपूर निभा रहे हैं।
आज्ञा नहीं माता मुझे किसी और काम की
‘आज्ञा नही है माता मुझे किसी और काम की..संवाद जागृति रामलीला में हनुमान ने सीता के समक्ष कहे तो दर्शकों ने तालियां बजा कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। हनुमान बने राजीव भाटिया ने अपने संवादों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला में लंका दहन के दृश्य का मंचन किया गया। इसमें हनुमान सीता के पास पहुंचते हैं। उन्हें राम निशानी दिखाते हैं। इसके बाद माता से कुछ खाने की आज्ञा लेकर रावण की वाटिका का विनाश करते हैं। रावण के सैनिक हनुमान को रोकते हैं। पर वे उन्हें रोक नहीं पाते। वे रावण अक्षय का वध कर देते हैं। इसके बाद मेघनाद हनुमान को पकड़ने के लिए ब्रह्म अस्त्र चलाते हैं। इसका सम्मान करते हुए वे स्वयं बंध जाते हैं। रावण सजा के तौर पर हनुमान की पूंछ में आग लगा देते हैं। इससे रावण की सोने की लंका को जलाकर खाक कर देते हैं। रावण की भूमिका दिलबाग, मेधनाद कप्तान ने अपने जान फूंक दी। इसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस अवसर पर खोसला का घोसला फिल्म के कलाकार राम जी बाली मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। उन्होंने भी कलाकारों के अभिनय की प्रशंसा की।
हनुमान ने उजाड़ी रावण की अशोक वाटिका
श्री धार्मिक लीला कमेटी एनआईटी-5 नंबर के डायरेक्टर हरीश चंद्र आजाद ने बताया कि रामलीला शुरू करने से पहले सभी सदस्यों ने शहीद भगत सिंह का जन्म दिन मनाया। इसके बाद मंचन शुरू हुआ। इसके बाद बाली वध दिखाया व हनुमान ने अशोक वाटिका को उजाड़ा। उन्होंने बताया कि बालि के रोल में नरेश चावला, सुग्रीव के रोल में अमित बांगा ने अपने डायलॉग से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। दोनों ने अपनी युद्ध कला से भी दर्शकों का ध्यान खींचा। आजाद के अनुसार दर्शकों को सबसे ज्यादा हनुमान ने अशोक वाटिका उजाड़ते हुए खूब फल खिलाए। हनुमान अशोक वाटिका के फल तोड़ते हुए दर्शकों में फेंकते।
काटी शूर्पणखा की नाक, खरदूषण वध
सेक्टर-15 की श्रद्धा रामलीला कमेटी की रामलीला में शूर्पणखा की भरत-राम मिलाप, शूर्पणखा की नाक काटने व खर-दूषण के वध का मंचन किया गया। लक्ष्मण के रूप में अनिल चावला ने अपनी प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया। इसके पहले दृश्य की शुरुआत भरत राम मिलाप से की गई। इसमें भरत राम से अयोध्या वापस चलने को कहते हैं। लेकिन राम वचनों का मान देते हुए आने से इंकार कर देते हैं। इसके बाद भरत चरण पादुका लेकर लौट जाते हैं। दूसरे दृश्य में शूर्पणखा राम के पास
विवाह प्रस्ताव लेकर पहुंचती है। राम उन्हें लक्ष्मण के पास भेज देते हैं। लक्ष्मण के भी विवाह से इंकार करने पर वे सीता को मारने के लिए आगे बढ़ती है। उनके इस दुस्साहस पर लक्ष्मण शूर्पणखा की नाक काट देते हैं। शूर्पणखा अपने भाई खर-दूषण के पास पहुंचकर सारी घटना बताती हैं। खर-दूषण राम-लक्ष्मण पर हमला करते हैं। जहां राम उन दोनों का वध कर देते हैं। इसके बाद शूर्पणखा अपने भाई रावण के पास पहुंचती है। सारी घटना बताती है।
सीता का स्वयंवर, लक्ष्मण-परशुराम संवाद
सेक्टर-3 रामलीला व दशहरा कमेटी की रामलीला में सीता स्वयंवर का मंचन हुआ। इसमें धनुष भंग करने के दृश्य को भव्य ढंग से दिखाया गया। जनक की घोषणा के बाद सभी देशों से राजा-महाराजा स्वयंवर में पहुंचते हैं। रावण भी स्वयंवर में पहुंचता है। लेकिन कोई भी शिव धनुष को टस से मस नहीं कर पाता। ऐसे में गुरु से आज्ञा लेकर राम धनुष का सहज से उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं और धनुष टूट जाता है। इसके बाद सीता श्री राम को जयमाला डालती हैं। धनुष टूटते ही परशुराम मौके पर पहुंचते हैं। शिव धनुष किसने तोड़ा इस बारे में पूछते हैं। इस दौरान परशुराम व लक्ष्मण संवाद ने सभी की खूब तालियां बटोरीं। भगवान राम के साक्षात रूप के दर्शन करने के बाद वे लौट जाते हैं। इसके बाद राम बारात निकलती है और धूमधाम से राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का विवाह संपन्न होता है।
राम वनवास, पुत्र वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण
सेक्टर-3 की रामलीला में राम के राजतिलक की घोषणा सुनते ही मंथरा कैकेयी को भड़काती है। कैकेयी कोपभवन में चली जाती हैं। राजा दशरथ से वचन लेकर दो वर मांगती हैं। वे भरत के लिए राजगद्दी व राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगती हैं। दशरथ की भूमिका अजय गोयल ने निभाई। माता-पिता की आज्ञा मानकर राम-सीता व भाई लक्ष्मण समेत वन गमन करते हैं। पुत्र वियोग में दशरथ प्राण त्याग देते हैं। उधर भरत सूचना मिलते ही अयोध्या पहुंचते हैं। अपनी मां के हठ को जानकर वे उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाते हैं। इसके बाद दशरथ का अंतिम संस्कार कर श्रीराम को वापस लाने के लिए वन पहुंचते हैं। राम के चलने से इंकार करने पर वे उनकी चरण पादुका लेकर अयोध्या पहुंचते हैं।
चरण पादुका लेकर वापस अयोध्या लौटे भरत
सेक्टर-37 दशहरा व रामलीला कमेटी की रामलीला में दशरथ का अंतिम संस्कार करने के बाद भरत भाई राम, भाभी सीता व लक्ष्मण को वापस लाने के लिए वन जाते हैं। वे राम से अपनी माता की गलतियों की क्षमा मांगते हैं। उनसे वापस अयोध्या चलने को कहते हैं। लेकिन राम पिता के वचनों व रघुवंश की रीत का मान रखते हुए आने से इंकार कर देते हैं। ऐसे में भरत राम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटते हैं। उनकी चरण पादुका को सिंहासन पर विराजित कर कार्यकारी राजा के रूप में एक संन्यासी जीवनशैली अपनाकर राज संभालते हैं।
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