कोर्ट का हाल : सुबह से शाम तक 1700 से अधिक वकील और 25 जज कोर्ट में रहते हैं। वकीलों के अनुसार अदालत में सुरक्षा के खोखले इंतजाम के कारण सभी वकीलों को अपनी जान का खतरा रहता है। जबकि यहां कुख्यात बदमाशों की पेशी पर उनसे मिलने के लिए इस किस्म के काफी बदमाश आते हैं। सुरक्षा में चूक के कारण कई बार अदालत से कैदी भाग चुके हैं। अदालत परिसर में वकीलों की सीटों का रात को भगवान ही रखवाला होता है। पूरे अदालत परिसर में एक भी बल्ब नहीं जलता है। वकीलों की सीटों के ऊपर लगे पंखे सहित अन्य सामान भी चोरी होते रहते हैं। सुरक्षा के लिहाज से अदालत के प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर डोर शोपीस बने हुए हैं।
लघु सचिवालय का हाल : जिले में अधिकारियों का मुख्यालय माने जाने वाले लघु सचिवालय में भी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। यहां मेटल डिटेक्टर डोर है ही नहीं। इसके अलावा डीसी सहित अन्य अधिकारियों से मिलने जाने वालों की चेकिंग भी नहीं होती। लघु सचिवालय की छह मंजिला इमारत में सुरक्षाकर्मी नहीं हैं। इसके अलावा लघु सचिवालय के मेन गेट पर पुलिसकर्मी इधर-उधर बैठे रहते हैं और किसी भी आने व जाने वाले से पूछताछ नहीं होती। मुख्य बात तो यह है कि डीसी, डीसीपी सेंट्रल सहित अन्य अधिकारियों के दफ्तर के बाहर कैमरे शोपीस बने हैं।
तहसील का हाल
तहसील में भी सुरक्षा नाम की कोई चीज नहीं है। यहां हर समय काफी भीड़ रहती है। एसडीएम, तहसीलदार व आरडीओ सहित अन्य अधिकारी तहसील में बैठते हैं। यहां एसडीएम के गनमैन के अलावा और कोई पुलिसकर्मी सुरक्षा में नहीं रहते, जबकि यहां आए दिन हंगामा व हाथापाई होती रहती है।
^जिले के मुख्यालय की सुरक्षा अहम है। इसलिए कोर्ट के मेन व दूसरे गेट पर पुलिसकर्मी बिठाए हुए हैं। अगर पुलिस सुरक्षा में लापरवाही बरत रही है तो औचक निरीक्षण किया जाएगा। सीसीटीवी कैमरों को ठीक करा दिया जाएगा।
सुमित कुहाड़, डीसीपी, सेंट्रल।
^कोर्ट व प्रशासन में आज वकील, अधिकारी, स्टाफ, क्लाइंट सहित न्यायाधीश भी सुरक्षित नहीं हैं। यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
जेपी अधाना, प्रधान, जिला बार एसोसिएशन।
(फोटो- सेक्टर 12 लघु सचिवालय के गेट पर सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नही।)