फरीदाबाद। अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में चौपाल पर कलाकारों के कार्यक्रम की मस्ती पूरी तरह से मेला दर्शकों पर छाई रही। बुधवार को कलाकारों ने मस्ती भरे अंदाज में अपने कार्यक्रम पेश किए तो चौपाल पर दर्शक भी उसी अंदाज में झूम उठे। मेला परिसर में मस्ती की पाठशाला लगी रही। बुधवार को 15 ग्रुपों ने चौपाल और करीब 5 ग्रुप मेला परिसर में दर्शकों को रिझाने के लिए लगे रहे।
चौपाल पर कार्यक्रमों की शुरुआत थीम स्टेट छत्तीसगढ़ ने की। इसके बाद अरुणाचल, लद्दाख, असम, ओडिशा, मेघालय, तेलंगाना, लक्ष्यद्वीप के कलाकारों ने पूरा मस्ती का माहौल बना दिया। इस माहौल को विदेशी रसिया, जार्जिया, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, बेलारूस के तड़के ने दोगुना कर दिया। मेले में छत्तीसगढ़ के राउत नाचा और लोहटी बाजा, बंचारी के नगाड़े और बीन पर दर्शक मस्ती में झूमते नाचते दिखे।
छत्तीसगढ़ का लोहटी बाजा
छत्तीसगढ़ के इस आदिवासी नृत्य को शादी-विवाह और खुशी के अवसर पर किया जाता है। अंबिकापुर गांव से 18 कलाकार इस डांस की प्रस्तुति देने मेले में आए हैं। इसमें बारहसिंगा की तरह की सींगों के बीच में एक ढोल फंसी होती है और उसे कमर पर बांध कर इस नृत्य को एक अलग अंदाज में कलाकार पेश करते हैं। कोआर्डिनेटर बसंतराम के अनुसार इस डांस को मस्ती में झूम-झूमकर किया जाता है। इसमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सब शामिल होते हैं।
लद्दाख का चर्सिसा
इस डांस को वहां मौजूद लेह नदी पर गर्मी में जून-जुलाई में आने वाले पक्षियों के स्वागत के लिए किया जाता है। इन पक्षियों को उनके यहां चांढुमढुम और कर्मों कहकर पुकारा जाता है। इन पक्षियों के आने को वहां शुभ माना जाता है। उनके स्वागत में ही नृत्य को वहां बहुत पुराने समय से किया जा रहा है। 14 कलाकारों ने इस प्रस्तुति को मेले में दर्शकों के आगे रखा।
बिलासपुर की पनघट लीला
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से आए 14 कलाकारों ने राधा-कृष्ण की पनघट की लीलाओं को इस डांस के माध्यम से दर्शकों के सम्मुख रखा। इन कलाकारों की प्रस्तुति से मेला चौपाल पर भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने कलाकारों की प्रस्तुति की तारीफ में जमकर तालियां बजाईं।