फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में शनिवार का नजारा देखने लायक था। यहां आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान जब आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति चल रही थी उसी समय विदेशी पर्यटक भी अपने आपको नहीं रोक पाए और आदिवासी कलाकारों के साथ जमकर नृत्य किया। मेला देखने आ रहे देशी-विदेशी मेहमानों को यहां बहुत कुछ देखने और दूसरे देशों की संस्कृति को समझने का मौका मिल रहा है।
सूरजकुंड मेले में वीकेंड पर बढ़ी रौनक के बीच कलाकारों ने खूब धमाल मचाया। उमड़ी भीड़ से हस्तशिल्पियों के चेहरों पर भी रौनक देखी गई। दोनों चौपालों पर कलाकारों ने अपनी लोक संस्कृति का परिचय देकर पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों द्वारा पेश कार्यक्रमों पर दर्शकों ने खूब तालिया बजाईं। वहीं विदेशी सैलानी भी मेले में खूब दिखे। मेले में श्रीलंका के कलाकारों ने डांस से भीड़ का खूब मनोरंजन किया। गुजरात, छत्तीसगढ़,
जम्मू, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पंजाब, यूपी व हरियाणा के कलाकारों ने भी दोनों चौपाल पर कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं विदेशी कलाकारों में कजाकिस्तान, बेलारूस, रशिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान आदि ने भी पयर्टकों को रिझाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
डांस ग्रुपों ने लोकनृत्यों से समां बांधा
मेले की चौपाल पर शनिवार को 22 से अधिक डांस ग्रुपों ने लोकनृत्यों से समां बांध दिया। साथ ही विदेशी कलाकारों में रशिया के पपेट ग्रुप, कजान के कलाकार ने अपने चिरपरिचित अंदाज में नृत्य की पेशकश की। किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस, कजाकिस्तान के कलाकारों ने मेले की रौनक को दोगुना करने का प्रयास किया। वहीं देसी कलाकारों में गुजरात के सिद्धिगोमा और डांडिया रास, जम्मू के कुठ, पंजाब के भांगड़ा, छत्तीसगढ़ का दीवारकर्मा, पंथी और तपन्यता गुल्लू ने जमकर चौपाल पर धमाल मचाया।
90 हजार लोगो पहुंचे
शाम 5.30 बजे तक 90 हजार 843 लोगों ने मेले का लुत्फ उठाया। 6 दिन से वीरान पड़ा मेला शनिवार को कुछ ज्यादा ही रोशन दिखा। मेले की सभी पार्किंग फुल हो गई। वहीं दिल्ली-फरीदाबाद के सूरजकुंड को आने वाले सभी मार्गों पर लोगों को कई किलोमीटर लंबे जाम से दो-चार होना पड़ा। पुलिसकर्मी भी इस जाम के जंजाल से निपटने में अपना सिर खपाते दिखे। शनिवार को उमड़ी भीड़ की वजह से दोपहर 1 बजे के बाद मेले की सभी पार्किंग फुल हो गई।
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